Rajthal Village Drug Free Campaign : फतेहाबाद। करीब 10 दिन से लापता एक राजमिस्त्री आखिरकार ऐसी जगह से मिला, जहां किसी के इतने दिनों तक जिंदा रहने की कल्पना भी मुश्किल है। फतेहाबाद जिले के धारसूल कलां में सोमवार सुबह झाड़ियों के पीछे बने एक खुले सीवरेज टैंक से अचानक कराहने की आवाज सुनाई दी। ग्रामीणों ने जब अंदर झांककर देखा तो 51 वर्षीय गुरमेल सिंह उर्फ गेलीराम टैंक में फंसे हुए मिले।
बताया जा रहा है कि गुरमेल सिंह 5 सितंबर को घर से निकले थे, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटे। परिजनों ने उनकी तलाश शुरू करने के साथ पुलिस को भी सूचना दी थी। गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस और परिवार ने कई संभावित स्थानों पर खोजबीन की। नहरों से लेकर धार्मिक स्थलों तक उनकी तलाश की गई, लेकिन करीब दस दिनों तक कोई सुराग नहीं मिल सका।
सोमवार सुबह धारसूल कलां अनाज मंडी के आसपास तलाश के दौरान ग्रामीणों को झाड़ियों के पीछे बने एक कमरे की तरफ से कुछ आवाज सुनाई दी। पास जाकर देखा तो आवाज करीब 20 फीट गहरे सीवरेज टैंक के भीतर से आ रही थी। ग्रामीणों ने तुरंत मदद जुटाई और रस्सियों के सहारे गुरमेल सिंह को बाहर निकाला।
बाहर आने के बाद उन्हें टोहाना नागरिक अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकीय जांच के बाद उनकी हालत सामान्य बताई गई। इसके बाद उन्हें घर भेज दिया गया। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि करीब 20 फीट गहरे और लगभग 10 फीट चौड़े टैंक में वह पहुंचे कैसे और इतने लंबे समय तक वहां किस तरह जीवित रहे।
परिवार के मुताबिक, गुरमेल सिंह को इन करीब 10 दिनों की घटनाओं के बारे में कुछ भी याद नहीं है। वह यह भी नहीं बता पा रहे कि वह टैंक तक कैसे पहुंचे, उसमें कैसे गिरे और इतने दिनों तक उन्होंने क्या खाया या पिया। हैरानी की बात यह भी है कि गंदे पानी और नमी के बीच इतने दिनों तक रहने के बावजूद उनके शरीर पर गंभीर चोट या त्वचा के गलने जैसे स्पष्ट निशान नहीं मिले।
इस घटना ने धारसूल कलां अनाज मंडी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस कमरे में सीवरेज टैंक बना हुआ था, उसका दरवाजा टूटा बताया जा रहा है और टैंक भी खुला पड़ा था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मंडी परिसर में खुले टैंक को इतने समय तक सुरक्षित क्यों नहीं किया गया।
मामले का संज्ञान लेते हुए धारसूल मार्केट कमेटी प्रशासन ने अब टैंक को स्थायी रूप से बंद कराने की बात कही है। मार्केट कमेटी सचिव ईश्वर ढाका के अनुसार, जल्द ही टैंक को बंद कर दिया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
फिलहाल गुरमेल सिंह अपने घर पर हैं और सामान्य बातचीत कर रहे हैं। लेकिन उनकी जिंदगी के ये 10 दिन अभी भी रहस्य बने हुए हैं। 20 फीट गहरे टैंक में वह कैसे पहुंचे और बिना भोजन-पानी के इतने लंबे समय तक कैसे जीवित रहे, इन सवालों का जवाब खुद गुरमेल सिंह के पास भी नहीं है।
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