बरेली. महाराष्ट्र में आरक्षण को लेकर जारी बहस के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि देश में अब आरक्षण की जरूरत नहीं है और सभी वर्गों को सामान्य दर्जा दिया जाना चाहिए. उनका कहना है कि पिछले दो-तीन दशकों में लोगों की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति में काफी बदलाव आया है.

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आर्थिक स्थिति में बदलाव का दिया तर्क

मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि पहले जिन परिवारों के घर खपरैल या छप्पर के हुआ करते थे, उनमें से कई अब पक्के मकानों में रह रहे हैं. उन्होंने आर्थिक बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन लोगों के लिए पहले साइकिल खरीदना मुश्किल था, आज उनके पास दो-तीन मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहन तक हैं. उनके मुताबिक, इन बदलावों को देखते हुए आरक्षण की व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए.

सभी को सामान्य दर्जा देने की मांग

मौलाना ने कहा कि आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक परिस्थितियों में बदलाव आया है, इसलिए किसी भी वर्ग को आरक्षण देने की जरूरत नहीं रह गई है. उन्होंने सभी को सामान्य दर्जा देने की बात कही, ताकि उनके मुताबिक किसी तरह का भेदभाव न रहे.

महाराष्ट्र में आरक्षण पर चल रही बहस

उनका बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण और ओबीसी कोटे को लेकर राजनीतिक बहस जारी है. मौलाना ने अलग-अलग समुदायों की ओर से आरक्षण की मांग को लेकर होने वाले आंदोलनों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ऐसे आंदोलनों से सरकारों पर दबाव बनता है और इस मुद्दे पर समाधान की जरूरत है.

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दो-तीन दशकों की प्रगति का हवाला

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि उन्होंने पिछले दो-तीन दशकों में देश को काफी आगे बढ़ते देखा है. इसी आधार पर उन्होंने आरक्षण के मुद्दे का समाधान कर इसे समाप्त करने की बात कही. महाराष्ट्र के संदर्भ में भाजपा विधायक राम कदम ने भी मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि 13 में से 12 मांगें पूरी हो चुकी हैं, जबकि एक मामला अदालत के अधिकार क्षेत्र में है.