नई दिल्ली: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सिरसा के पत्रकार राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने राम रहीम के वकील आर. बसंत की आपत्तियों को खारिज कर दिया। राम रहीम की ओर से दलील दी गई थी कि यह बरी किए जाने का मामला है और राज्य की ओर से इस फैसले के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की गई है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि मामले पर विचार करने की जरूरत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई सजा को पलटने का मामला है, बल्कि हाई कोर्ट की ओर से बरी किए जाने की पुष्टि का मामला नहीं है।
पीठ ने यह भी कहा कि वह इस बात से पूरी तरह अवगत है कि राज्य यानी सीबीआई बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील नहीं करेगी।
गौरतलब है कि गुरमीत राम रहीम को अपनी दो महिला शिष्याओं के यौन शोषण के मामले में 20 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। वहीं, सिरसा के पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की वर्ष 2002 में हुई हत्या के मामले में उसे बरी कर दिया गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनौती याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताने के बाद 2002 के इस चर्चित हत्याकांड में राम रहीम के बरी होने के फैसले पर एक बार फिर कानूनी नजरें टिक गई हैं.
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