बांदा/झांसी. रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास में कई ऐसी कहानियां हैं, जिन्होंने रिश्तों की सीमाओं से आगे बढ़कर एकता और भाईचारे का संदेश दिया. सन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और बांदा के नवाब अली बहादुर द्वितीय की कहानी इसका अनूठा उदाहरण मानी जाती है. कहा जाता है कि अंग्रेजों से घिरी रानी लक्ष्मीबाई ने अपने मुंहबोले भाई नवाब अली बहादुर को राखी भेजकर मदद मांगी थी. इसके बाद नवाब अपनी सेना लेकर रानी के साथ अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध में उतर गए.
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अंग्रेजों ने झांसी के किले को घेर लिया था
1857 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह तेज हो चुका था. झांसी में रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए थीं. जब अंग्रेजी सेना ने झांसी के किले को घेर लिया तो रानी को अतिरिक्त सैन्य मदद की जरूरत महसूस हुई. उस समय बांदा के नवाब अली बहादुर द्वितीय थे. उन्हें रानी लक्ष्मीबाई अपना मुंहबोला भाई मानती थीं. इतिहास में अली बहादुर को बाजीराव पेशवा और मस्तानी का वंशज बताया जाता है.
राखी के साथ भेजा संदेश- ‘बहन की लाज खतरे में है’
कहा जाता है कि रानी लक्ष्मीबाई ने मदद के लिए नवाब अली बहादुर को पत्र भेजा था. पत्र के साथ राखी भी भेजी गई थी. इसमें अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में साथ देने और झांसी की रक्षा के लिए मदद की अपील की गई थी. बताया जाता है कि यह संदेश रानी के विश्वस्त लाला दुलारे लाल के माध्यम से 26 मार्च 1857 को बांदा के नवाब तक पहुंचा था. रानी ने अंग्रेजों के कब्जे के खिलाफ लड़ाई में अपने भाई से सहायता मांगी थी.
भाई की राखी की लाज रखने फौज लेकर पहुंचे नवाब
रानी की राखी और संदेश मिलने के बाद नवाब अली बहादुर द्वितीय ने उनकी मदद करने का फैसला किया. उपलब्ध विवरणों के अनुसार, वह अपनी बड़ी सैन्य टुकड़ी और तोपखाने के साथ झांसी की ओर रवाना हुए. उन्होंने अंग्रेजी सेना के खिलाफ मोर्चा लिया और स्वतंत्रता संग्राम में रानी का साथ दिया. इसके बाद कालपी और ग्वालियर के युद्धों में भी रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के साथ नवाब अली बहादुर के सहयोग का उल्लेख मिलता है. यह रिश्ता उस दौर में अंग्रेजों के खिलाफ अलग-अलग शक्तियों के एकजुट होने का प्रतीक बना.
राखी बनी हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
रानी लक्ष्मीबाई और नवाब अली बहादुर द्वितीय की यह कहानी बुंदेलखंड की लोकस्मृति में आज भी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल के तौर पर याद की जाती है. रानी ने भानपुर के राजा अरिदमन सिंह से भी सहायता मांगी थी और उन्होंने भी संघर्ष में उनका साथ दिया.
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रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को हुआ था। वह 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख हस्तियों में शामिल थीं. 17 जून 1858 को अंग्रेजों से लड़ते हुए वह वीरगति को प्राप्त हुईं. उनकी वीरता आज भी भारतीय इतिहास में अंग्रेजी शासन के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक मानी जाती है. वहीं राखी और नवाब अली बहादुर से जुड़ा यह प्रसंग रक्षाबंधन के धागे में छिपी एकता, विश्वास और भाईचारे का संदेश देता है.


