पूरी: महाप्रभु श्री जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा के अंतिम और महत्वपूर्ण पर्व ‘नीलाद्रि बीजे’ (Niladri Bije) के पावन अवसर पर पूरे ओडिशा में ‘रसगुल्ला दिवस’ अत्यंत उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। इस सांस्कृतिक परंपरा को यादगार बनाने के लिए पूरी के समुद्र तट पर एक बेहद आकर्षक बालू कला बनाई गई है।

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बालू शिल्पकार और पद्मश्री से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने पूरी बेलाभूमि पर 7 फीट ऊंची एक मनोरम रेत की मूर्ति का निर्माण किया है। इस कलाकृति में महाप्रभु श्री जगन्नाथ और देवी लक्ष्मी की भावपूर्ण आकृतियों के साथ रसगुल्ला भोग का मनमोहक दृश्य दिखाया गया है। इसके माध्यम से सभी को “हैप्पी रसगुल्ला दिवस” का बधाई संदेश भी दिया गया है।

नीलाद्रि बीजे और रसगुल्ला दिवस की अनोखी परंपरा

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, गुंडीचा यात्रा (मासी के घर) से लौटने के बाद, महाप्रभु श्री जगन्नाथ के बिना बताए चले जाने से नाराज होकर मां लक्ष्मी मंदिर के मुख्य द्वार को बंद कर देती हैं। नीलाद्रि बीजे के दिन रत्न सिंहासन पर विराजमान होने से पहले महाप्रभु जगन्नाथ, मां लक्ष्मी के मान-अभिमान को दूर करने के लिए उन्हें मीठा और स्वादिष्ट रसगुल्ला भोग स्वरूप अर्पित करते हैं।

इस पौराणिक कथा और पवित्र परंपरा को याद करने तथा ओडिशा के रसगुल्ले की प्राचीनता को नमन करने के उद्देश्य से हर साल नीलाद्रि बीजे के दिन ‘रसगुल्ला दिवस’ मनाया जाता है।

समुद्र तट पर बनाई गई इस खूबसूरत बालू कला को देखने के लिए पर्यटकों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। ओडिशा की इस समृद्ध संस्कृति और परंपरा को रेत के माध्यम से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के इस प्रयास की हर तरफ सराहना हो रही है।