Business Desk – RBI Repo Rate History : केंद्रीय बैंक RBI हर दो महीने में अपनी मॉनेटरी पॉलिसी की समीक्षा करता है, जिसके बाद रेपो रेट की घोषणा की जाती है. RBI की घोषणा में न केवल रेपो रेट शामिल होता है, बल्कि बाजार RBI गवर्नर के साथ में दिए गए महंगाई और अर्थव्यवस्था की स्थिति से जुड़े बयानों पर भी पैनी नजर रखता है.

रेपो रेट की बात है, पिछले 16 सालों में इसमें काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. यह 5% से बढ़कर 8% हो गया, फिर घटकर 4% पर आ गया, तब से इसमें फिर से बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया है. मार्च 2010 में, रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) बढ़ाकर 5.00% कर दिया गया था, जिसके बाद यह धीरे-धीरे बढ़कर जनवरी 2014 तक 8.00% तक पहुंच गया.
इसके बाद इसमें धीरे-धीरे गिरावट आने लगी, और COVID-19 महामारी के दौरान यह घटकर 4% पर आ गया. यह कई महीनों तक इसी निचले स्तर पर बना रहा. फिलहाल, कुछ उतार-चढ़ाव के बीच, यह 5.25% पर है. यहां पिछले 16 सालों में रेपो रेट में हुए खास बदलावों कब और कितना बदलाव हुआ की जानकारी दी गई है.
रेपो रेट हिस्ट्री: 16 वर्षों में ऐसा रहा उतार-चढ़ाव
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की रेपो रेट में 2010 से 2025 तक कई बार बदलाव हुए हैं. यह बदलाव देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई और विकास की जरूरतों के अनुसार समय-समय पर किए गए. नीचे सभी तारीखों के साथ पूरा इतिहास दिया गया है.
2010–2011: लगातार बढ़ोतरी का दौर
19 मार्च 2010 को रेपो रेट 5.00% (+0.25%) रही.
20 अप्रैल 2010 को यह बढ़कर 5.25% (+0.25%) हो गई.
2 जुलाई 2010 को 5.50% (+0.25%) दर्ज की गई.
27 जुलाई 2010 को यह 5.75% (+0.25%) पर पहुंची.
16 सितंबर 2010 को 6.00% (+0.25%) हो गई.
2 नवंबर 2010 को यह 6.25% (+0.25%) रही.
25 जनवरी 2011 को रेपो रेट 6.50% (+0.25%) दर्ज की गई.
17 मार्च 2011 को यह 6.75% (+0.25%) तक पहुंच गई.
2013–2014: उच्च स्तर पर पहुंचने का दौर
3 मई 2013 को रेपो रेट 7.25% (+0.50%) रही.
20 सितंबर 2013 को यह 7.50% (+0.25%) हो गई.
29 अक्टूबर 2013 को 7.75% (+0.25%) दर्ज हुई.
28 जनवरी 2014 को यह अपने उच्च स्तर 8.00% (+0.25%) पर पहुंच गई.
2015–2017: कटौती का दौर शुरू
15 जनवरी 2015 को रेपो रेट 7.75% (-0.25%) रही.
4 मार्च 2015 को यह 7.50% (-0.25%) हो गई.
2 जून 2015 को 7.25% (-0.25%) दर्ज की गई.
29 सितंबर 2015 को यह घटकर 6.75% (-0.50%) हो गई.
5 अप्रैल 2016 को रेपो रेट 6.50% (-0.25%) रही.
4 अक्टूबर 2016 को यह 6.25% (-0.25%) दर्ज की गई.
2 अगस्त 2017 को रेपो रेट 6.00% (-0.25%) रही.
2018–2020: उतार-चढ़ाव और तेज गिरावट
6 जून 2018 को रेपो रेट 6.25% (+0.25%) रही.
1 अगस्त 2018 को यह 6.50% (+0.25%) हो गई.
7 फरवरी 2019 को 6.25% (-0.25%) दर्ज हुई.
4 अप्रैल 2019 को यह 6.00% (-0.25%) रही.
6 जून 2019 को 5.75% (-0.25%) हो गई.
7 अगस्त 2019 को यह 5.40% (-0.35%) दर्ज की गई.
6 फरवरी 2020 को रेपो रेट 5.15% (-0.25%) रही.
27 मार्च 2020 को यह तेज गिरावट के साथ 4.40% (-0.75%) हो गई.
22 मई 2020 को 4.00% (-0.40%) दर्ज हुई.
6 अगस्त 2020 को 4.00% (0.00%) रही.
9 अक्टूबर 2020 को भी यह 4.00% (0.00%) पर स्थिर रही.
2022–2023: महंगाई नियंत्रण के लिए बढ़ोतरी
मई 2022 में रेपो रेट 4.40% (+0.40%) रही.
8 जून 2022 को यह 4.90% (+0.50%) हो गई.
5 अगस्त 2022 को 5.40% (+0.50%) दर्ज हुई.
30 सितंबर 2022 को यह 5.90% (+0.50%) रही.
7 दिसंबर 2022 को रेपो रेट 6.25% (+0.35%) हो गई.
8 फरवरी 2023 को यह 6.50% (+0.25%) तक पहुंच गई.
8 जून 2023 को यह 6.50% (0.00%) पर स्थिर रही.
2024–2025: स्थिरता और हल्की कटौती का दौर
18 सितंबर 2024 को रेपो रेट 6.50% (0.00%) रही.
6 दिसंबर 2024 को भी यह 6.50% (0.00%) पर स्थिर रही.
7 फरवरी 2025 को यह घटकर 6.25% (-0.25%) हो गई.
9 अप्रैल 2025 को 6.00% (-0.25%) दर्ज हुई.
6 जून 2025 को यह 5.50% (-0.50%) तक आ गई.
6 अगस्त 2025 को रेपो रेट 5.50% (0.00%) रही.
5 दिसंबर 2025 को यह 5.25% (+0.25%) दर्ज की गई.
रेपो रेट कितना जरूरी है ?
रेपो रेट एक मॉनेटरी पॉलिसी का टूल है जिसका इस्तेमाल RBI महंगाई, लिक्विडिटी और आर्थिक विकास को मैनेज करने के लिए करता है. यह उस ब्याज दर को दिखाता है जिस पर कमर्शियल बैंक, सरकारी सिक्योरिटीज को गिरवी रखकर, RBI से पैसे उधार लेते हैं.
रेपो रेट का आम लोगों पर सीधा असर पड़ता है, क्योंकि यह उस ब्याज दर को काफी हद तक प्रभावित करता है, जिस पर लोग लोन ले पाते हैं. जब रेपो रेट कम किया जाता है, तो लोन की किस्तों के कम होने की संभावना बढ़ जाती है. इसके उलट, जब इसे बढ़ाया जाता है, तो इस बात का जोखिम रहता है कि EMI यानी हर महीने की किस्तें बढ़ जाएंगी.

