नई दिल्ली: दिल्ली में निजी स्कूलों की ओर से अभिभावकों पर किताबें, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी किसी तय दुकान से खरीदने के दबाव को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सीएम रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी स्कूल को अभिभावकों को सीमित विक्रेताओं से खरीदारी के लिए बाध्य करने की अनुमति नहीं होगी। सरकार के इस फैसले के बाद पैरेंट्स को यह स्वतंत्रता मिलेगी कि वे किताबें, ड्रेस और स्टेशनरी किसी भी मान्यता प्राप्त विक्रेता से अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार खरीद सकें।मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों के हितों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कोई स्कूल इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी निर्देश के अनुसार, सभी प्राइवेट स्कूलों को अपने नोटिस बोर्ड, आधिकारिक वेबसाइट और यदि स्कूल का कोई खुद का स्टोर है, वहां स्पष्ट रूप से यह जानकारी प्रदर्शित करनी होगी कि अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी विक्रेता से किताबें, ड्रेस और स्टेशनरी खरीद सकते हैं।निर्देश में यह भी कहा गया है कि स्कूल केवल सुविधा के तौर पर कुछ दुकानों के नाम सुझा सकते हैं, लेकिन किसी भी स्थिति में किसी एक निर्धारित विक्रेता से खरीदारी को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि किसी स्कूल में नियमों का उल्लंघन या किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर स्कूल का टेकओवर भी किया जा सकता है।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश बेहद गंभीर है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करना है।यह सख्ती अभिभावकों से मिल रही लगातार शिकायतों के बाद सामने आई है। कई मामलों में आरोप लगाए गए थे कि निजी स्कूल बच्चों को किताबें और यूनिफॉर्म केवल अपनी तय दुकानों से खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह स्वयं भी किसी भी स्कूल में बिना पूर्व सूचना के औचक निरीक्षण के लिए पहुंच सकती हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि जहां भी अनियमितता या गड़बड़ी दिखे, उसकी जानकारी सरकार को दी जाए ताकि तत्काल कार्रवाई की जा सके।हाल ही में रोहिणी सेक्टर-13 स्थित एक स्कूल में निरीक्षण के दौरान फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और अन्य मानकों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसके बाद संबंधित सुविधाओं को सील कर दिया गया। सरकार ने संकेत दिया है कि ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक दबाव से राहत देना है। उन्होंने कहा कि निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा की जाएगी और जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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