दिल्ली सरकार ने पुराने और उपयोग योग्य कपड़ों के पुनः उपयोग को बढ़ावा देने तथा वस्त्र अपशिष्ट (टेक्सटाइल वेस्ट) को कम करने के उद्देश्य से ‘अर्पण’ योजना (Arpan campaign) शुरू की है। इस पहल के तहत राजधानी के 5 मेट्रो स्टेशनों पर विशेष संग्रह केंद्र बनाए गए हैं, जहां लोग अपने पुराने कपड़े दान कर सकते हैं। इस योजना के पीछे पर्यावरण संरक्षण की बड़ी सोच है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक जींस तैयार करने में औसतन करीब 3,781 लीटर पानी की खपत होती है। इसके अलावा कपड़ा उद्योग दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले क्षेत्रों में भी शामिल माना जाता है। ऐसे में कपड़ों का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
दिल्ली के 5 मेट्रो स्टेशनों से शुरू हुई ‘अर्पण’ योजना
दिल्ली सरकार ने कपड़ों के पुनः उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘अर्पण’ योजना की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को राजधानी के पांच प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर ‘अर्पण केंद्र’ का उद्घाटन किया, जहां लोग अपने पुराने लेकिन उपयोग योग्य कपड़े दान कर सकेंगे। योजना के तहत पंजाबी बाग पश्चिम, शालीमार बाग, मयूर विहार फेज-1, शाहदरा और रोहिणी पश्चिम मेट्रो स्टेशन पर अर्पण केंद्र स्थापित किए गए हैं। यह पहल दिल्ली सरकार, Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) और दिल्ली मेट्रो लेडीज वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के सहयोग से शुरू की गई है। सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य ऐसे कपड़ों को एकत्र करना है जो लोगों के लिए उपयोगी नहीं रह गए हैं, लेकिन अभी भी अच्छी स्थिति में हैं। इन कपड़ों को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जाएगा या फिर पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) के माध्यम से दोबारा उपयोग में लाया जाएगा।
क्या है ‘अर्पण केंद्र’ योजना?
दिल्ली मेट्रो के कुल 10 स्टेशनों पर ‘अर्पण’ कपड़ा संग्रह केंद्र स्थापित किए जाएंगे। पहले चरण में 5 मेट्रो स्टेशनों पर इसकी शुरुआत की जा चुकी है। इन केंद्रों पर लोग अपने पुराने लेकिन उपयोग योग्य कपड़े दान कर सकेंगे। एकत्र किए गए कपड़ों की छंटाई और रीसाइक्लिंग की जाएगी। रीसाइक्लिंग के बाद इन कपड़ों से बैग, नए वस्त्र, सजावटी सामान, धागा और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
कैसे कर सकेंगे कपड़े दान?
दिल्ली सरकार ने कपड़े दान करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया है। सभी अर्पण केंद्रों पर QR कोड लगाए जाएंगे। दानकर्ता QR कोड स्कैन करके अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। कपड़े जमा करने के बाद उन्हें डिजिटल रसीद भी प्रदान की जाएगी। पूरी प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अर्पण’ योजना की जरूरत क्यों पड़ी?
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की ‘अर्पण’ योजना केवल पुराने कपड़े इकट्ठा करने की पहल नहीं है, बल्कि तेजी से बढ़ रहे कपड़ा कचरे और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने की एक कोशिश भी है। सरकार का मानना है कि कपड़ों के पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग के जरिए पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक सहयोग को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, फास्ट फैशन के बढ़ते चलन ने दुनिया भर में कपड़ों की खपत और वस्त्र कचरे (टेक्सटाइल वेस्ट) में भारी वृद्धि की है। वर्ष 2000 की तुलना में आज लोग अधिक कपड़े खरीद रहे हैं और उन्हें कम समय तक इस्तेमाल करने के बाद बदल भी रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में कपड़े लैंडफिल में पहुंच रहे हैं या फिर जला दिए जाते हैं, जिससे पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
कपड़ा उद्योग से बढ़ रहा प्रदूषण
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार, कपड़ा और फैशन उद्योग वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का लगभग 2 से 8 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है। इसके अलावा कपड़ों के उत्पादन में भारी मात्रा में पानी और ऊर्जा की खपत होती है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल दुनिया भर में लाखों टन कपड़े कचरे के रूप में फेंक दिए जाते हैं। इनमें से बड़ी मात्रा लैंडफिल में पहुंचती है या जलाई जाती है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। वहीं, सिंथेटिक कपड़ों से निकलने वाले सूक्ष्म प्लास्टिक कण (माइक्रोफाइबर) नदियों और समुद्रों में पहुंचकर जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी खतरा बनते हैं।
इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने ‘अर्पण’ योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर बनाए गए अर्पण केंद्रों में लोग अपने पुराने लेकिन उपयोग योग्य कपड़े दान कर सकते हैं। एकत्र किए गए कपड़ों की छंटाई के बाद उनका पुनः उपयोग किया जाएगा या रीसाइक्लिंग के जरिए बैग, नए वस्त्र, धागे, सजावटी सामान और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि पुराने कपड़ों का पुनर्चक्रण केवल कचरा कम करने का उपाय नहीं है, बल्कि इससे जल, ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। उनका कहना है कि प्रत्येक दान किया गया कपड़ा पर्यावरण बचाने के साथ-साथ जरूरतमंद लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
अर्पण’ योजना से महिलाओं को भी मिलेगा रोजगार
दिल्ली सरकार की ‘अर्पण’ योजना केवल पर्यावरण संरक्षण और कपड़ा कचरा कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इस पहल में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पर्यावरणीय और सामाजिक दोनों उद्देश्यों को एक साथ हासिल किया जा सके। योजना के तहत मेट्रो स्टेशनों पर एकत्र किए गए पुराने कपड़ों की छंटाई, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) और उनसे नए उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया में महिलाओं को जोड़ा जाएगा। इससे उन्हें सम्मानजनक आजीविका के अवसर मिलने के साथ-साथ आर्थिक रूप से सशक्त बनने का मौका भी मिलेगा। सरकार के अनुसार, पुराने कपड़ों से बैग, नए वस्त्र, धागे, सजावटी सामान और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में स्वयं सहायता समूहों (SHGs), महिला उद्यमियों और स्थानीय स्तर पर कार्यरत महिला समूहों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
क्यों शुरू की गई ‘अर्पण’ योजना?
दिल्ली सरकार का मानना है कि बड़ी मात्रा में ऐसे कपड़े घरों में पड़े रहते हैं जो उपयोग योग्य होने के बावजूद फेंक दिए जाते हैं। इससे एक ओर वस्त्र अपशिष्ट बढ़ता है, वहीं दूसरी ओर नए कपड़ों के उत्पादन के लिए अधिक पानी, ऊर्जा और संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है। ‘अर्पण’ योजना का उद्देश्य ऐसे कपड़ों को एकत्र कर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना, उनका पुनः उपयोग सुनिश्चित करना और पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करना है।
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