भाजपा सांसद रेखा शर्मा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल के प्रति दिए गए विवादित बयान ने हरियाणा की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। जहाँ कांग्रेस विधायक ने कानूनी नोटिस भेजा है, वहीं भाजपा विधायक ने केंद्रीय नेतृत्व से शिकायत की बात कही है।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। भाजपा की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा द्वारा प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी भजनलाल को ‘बदमाश’ कहे जाने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस बयान से न केवल बिश्नोई समाज में गहरा रोष है, बल्कि भाजपा के भीतर भी विरोध के सुर तेज हो गए हैं। भजनलाल के पुत्र कुलदीप बिश्नोई के करीबी और भाजपा विधायक रणधीर पनिहार ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। पनिहार ने स्पष्ट किया है कि वे इस अमर्यादित टिप्पणी की शिकायत मुख्यमंत्री नायब सैनी, प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से करेंगे। उन्होंने कहा कि चौधरी भजनलाल जैसे कद्दावर नेता के प्रति देश भर में श्रद्धा है और ऐसे शब्द शोभा नहीं देते।

कानूनी नोटिस और बिश्नोई समाज की चेतावनी
इस मामले ने अब कानूनी मोड़ भी ले लिया है। चौधरी भजनलाल के बड़े बेटे और कांग्रेस विधायक चंद्रमोहन ने सांसद रेखा शर्मा को लीगल नोटिस भेजकर उनके बयान को गरिमा के खिलाफ बताया है और सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा है। वहीं, हिसार के बिश्नोई मंदिर में बिश्नोई सभा के प्रधान जगदीश कड़वासरा की अध्यक्षता में एक अहम बैठक बुलाई गई, जिसमें चेतावनी दी गई कि यदि रेखा शर्मा ने सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी, तो भविष्य में समाज द्वारा उनके कार्यक्रमों का कड़ा विरोध किया जाएगा। समाज के पूर्व प्रधान प्रदीप बेनीवाल ने भी इसे ओछी राजनीति करार दिया है, जिससे भाजपा के लिए अपने इस मजबूत वोट बैंक को संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
कुलदीप बिश्नोई का शायराना पलटवार और राजनीतिक भविष्य
पूरे घटनाक्रम के बीच कुलदीप बिश्नोई ने सीधे तौर पर कुछ न कहते हुए अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ पर एक शेर साझा कर अपनी नाराजगी और इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। उन्होंने लिखा, “हम समंदर हैं हमें खामोश रहने दो, जरा मचल गए तो शहर ले डूबेंगे।” इस पोस्ट को रेखा शर्मा के बयान के खिलाफ एक सशक्त जवाब के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि कुलदीप बिश्नोई वर्तमान में भाजपा का हिस्सा हैं, लेकिन पिता के सम्मान के मुद्दे पर वे अपने भाई चंद्रमोहन और समर्थकों के साथ एकजुट नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि भाजपा नेतृत्व ने इस पर ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह विवाद पार्टी के चुनावी समीकरणों पर भारी पड़ सकता है।

