दिल्ली में पानी के बिलिंग सिस्टम को लेकर उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से गलत रीडिंग और गलत बिलों की शिकायतों के बीच अब सुधार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने राजधानी की पूरी वाटर बिलिंग व्यवस्था को अपडेट और डिजिटल बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत पुराने और तकनीकी रूप से कमजोर मीटरों को हटाकर आधुनिक स्मार्ट वाटर मीटर लगाने की योजना है।इन नए मीटरों के जरिए पानी की खपत की रियल-टाइम और ज्यादा सटीक रीडिंग मिलने की उम्मीद है, जिससे मैनुअल एरर और गलत बिलिंग की समस्या कम हो सकेगी।

मीटर निर्माताओं का नया पैनल बनेगा

अधिकारियों के अनुसार, इसके लिए वाटर मीटर बनाने वाली कंपनियों का नया पैनल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक, पिछली बार इस तरह का पैनल 2018 में बनाया गया था। अब करीब 8 साल बाद तकनीक में आए बदलावों को देखते हुए नई और उन्नत तकनीक वाले मीटरों को शामिल करने के लिए कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य बेहतर गुणवत्ता वाले स्मार्ट मीटरों को शामिल करना है, जिससे पानी की खपत की रीडिंग अधिक सटीक हो और बिलिंग से जुड़ी समस्याएं कम हो सकें।

सटीक बिलिंग पर जोर

अधिकारी ने बताया कि पूरी दिल्ली में लगभग 29.90 लाख पानी के मीटर वाले कनेक्शन हैं, जो जल बोर्ड के राजस्व संग्रह में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए मीटरिंग सिस्टम का समय-समय पर रिव्यू और नई तकनीक को शामिल करना बेहद जरूरी हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, खराब मीटरों, पुरानी तकनीक और रीडिंग में मानवीय लापरवाही के कारण गलत बिलिंग की कई शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए सिस्टम को अपग्रेड किया जा रहा है।

फिलहाल जिन उपभोक्ताओं को 15 एमएम डायमीटर वाले मीटर की आवश्यकता होती है, उनके लिए जल बोर्ड के पैनल में 9 निर्माताओं के 10 मॉडल शामिल किए गए हैं। अब नई प्रक्रिया के तहत इस पैनल का विस्तार और तकनीकी उन्नयन किया जा रहा है, ताकि स्मार्ट और अधिक सटीक मीटरिंग सिस्टम लागू किया जा सके। अधिकारियों ने बताया कि जब कोई उपभोक्ता नया पानी कनेक्शन लेता है या पुराने मीटर को बदलवाता है, तो उसे पहले जल बोर्ड के पास मीटर की सिक्योरिटी राशि जमा करनी होती है। इसके बाद बोर्ड संबंधित मान्यता प्राप्त मीटरों को इंस्टॉल करता है। यह प्रक्रिया इसलिए अपनाई जाती है ताकि मीटरिंग सिस्टम में पारदर्शिता बनी रहे और उपभोक्ता को सही रीडिंग के आधार पर बिलिंग मिल सके।

कनेक्शनों का बनेगा डिजिटल डेटाबेस

हाल ही में जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने सभी पानी कनेक्शनों का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार करने की घोषणा की थी, ताकि बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जा सके और गलत बिलों की समस्या को कम किया जा सके।इसी क्रम में जल बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि अब मीटर बना ने वाली कंपनियों को बोर्ड द्वारा सुझाए गए सभी तकनीकी बदलावों और मानकों को लागू करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही कंपनियों को अपने सभी मीटर मॉडलों की विस्तृत जानकारी और प्रत्येक मॉडल का सैंपल भी जमा करना होगा।

इन सैंपलों और तकनीकी विवरणों की जांच के बाद ही कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा और पैनल में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल उच्च गुणवत्ता वाले और अधिक सटीक मीटरों को सिस्टम में शामिल करना है, ताकि भविष्य में बिलिंग संबंधी शिकायतों में कमी आए और उपभोक्ताओं को सही रीडिंग के आधार पर बिल मिल सके।

स्मार्ट मीटरिंग की ओर कदम

अधिकारियों के मुताबिक, इससे पहले 2022 में भी “स्मार्ट वाटर मीटर” लागू करने की पहल की गई थी, जिसके जरिए उपभोक्ताओं को ऐप आधारित शिकायत दर्ज करने और नए कनेक्शन जैसी सुविधाएं देने की योजना थी। हालांकि, वह योजना पूरे शहर में प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी और सीमित दायरे तक ही रह गई। अब जल बोर्ड एक बार फिर इस व्यवस्था को नए सिरे से लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत मीटर बनाने वाली कंपनियों को दोबारा शॉर्टलिस्ट किया जाएगा और उनके मीटर मॉडलों की तकनीकी जांच की जाएगी।

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