आशुतोष द्विवेदी, रीवा। रीवा जिले की मनगवां विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ग्रामीण सड़कों और सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है। करौंदहा से सटे नदना गांव में सड़क की सुविधा नहीं होने का दावा है। हालात ऐसे हैं कि मौत के बाद अंतिम यात्रा भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बन जाती है। ग्राम पंचायत नदना उर्फ डिहिया के ग्राम करौंदहा में सड़क की बदहाली का दावा एक बार फिर सामने आया है।

स्थानीय जानकारी के मुताबिक, रिटायर्ड शिक्षिका बताई जा रही कमलेश प्रसाद ओझा की पत्नी के निधन के बाद उनके शव को करीब दो किलोमीटर तक कंधे पर लेकर जाना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। करीब पांच वर्ष पहले भी कमलेश प्रसाद ओझा के भाई की पत्नी के निधन पर शव को इसी तरह कंधे पर ले जाना पड़ा था। यानी ग्रामीणों के मुताबिक वर्षों से सड़क की समस्या बनी हुई है।

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डेढ़ साल पहले विधायक ने किया था निरीक्षण

ग्रामीणों के अनुसार, करीब डेढ़ साल पहले विधायक नरेंद्र प्रजापति स्वयं सड़क का निरीक्षण करने पहुंचे थे। ग्रामीणों का दावा है कि उस दौरान विधायक ने सड़क निर्माण को लेकर भरोसा दिलाते हुए कहा था कि अगर सड़क ऐसी नहीं बनी, जिस पर मोटरसाइकिल, कार और चार पहिया वाहन निकल सकें, तो जनप्रतिनिधि होने का क्या फायदा। लेकिन आज भी सड़क की स्थिति जस की तस होने का दावा किया जा रहा है।

आरटीआई के बाद निर्माण कार्य पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने आरटीआई के जरिए सड़क निर्माण से जुड़ी जानकारी हासिल की, जिसमें 57 गाड़ी मुरुम और 29 गाड़ी मिट्टी डाले जाने की जानकारी सामने आई। ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि कागजों में काम दिखाई देता है, लेकिन मौके की स्थिति अलग तस्वीर बयां कर रही है। मामले की जांच के लिए संबंधित विभाग में आवेदन दिए जाने की बात भी कही जा रही है, हालांकि ग्रामीणों का दावा है कि अब तक मौके पर जांच नहीं हुई।

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ग्रामीणों के मुताबिक, जनपद पंचायत सिरमौर, जिला पंचायत रीवा और कलेक्टर कार्यालय में कई बार शिकायत की गई है। जनसुनवाई में भी आवेदन देने की बात सामने आई है। अब सवाल सीधा है कि आखिर करौंदहा से नदना तक सड़क कब बनेगी? ग्रामीणों को शव कंधे पर ले जाने की मजबूरी से कब निजात मिलेगी? और डेढ़ साल पहले दिए गए विधायक के आश्वासन का क्या हुआ? ग्रामीण अब आश्वासन नहीं, जमीन पर सड़क चाहते हैं।

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