रेवाड़ी के अंबेडकर चौपाल स्थित राशन डिपो में बारिश के पानी से खराब हुए अनाज को बांटने की कोशिश की खबर पर विभाग ने एक्शन लिया है। तीन निरीक्षकों की टीम ने छापेमारी कर भीगी हुई चीनी, गेहूं और कीचड़ लगी सरसों तेल की बोतलें बरामद की हैं।

रेवाड़ी। अंबेडकर चौपाल स्थित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के सरकारी डिपो में बारिश के चलते भीगे अनाज को दोबारा उपभोक्ताओं को बांटने की शिकायतों के बाद विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर गठित तीन निरीक्षकों की विशेष टीम ने संबंधित राशन दुकान पर औचक छापेमारी की और पूरे मामले की बारीकी से जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।

भीग गया था सरकारी अनाज

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बीते दिनों इलाके में हुई मूसलाधार बारिश की वजह से अंबेडकर चौपाल परिसर में भारी जलभराव हो गया था। इस पानी की चपेट में आने से डिपो में रखा हुआ गरीब परिवारों का सरकारी गेहूं बुरी तरह गीला हो गया था। आरोप है कि डिपो संचालक ने इस खराब हो चुके अनाज को फेंकने या बदलने के बजाय धूप में सुखाकर दोबारा कार्डधारकों को ही वितरित करने की पूरी तैयारी कर ली थी, जिसे मीडिया द्वारा प्रमुखता से उजागर किया गया था।

छापेमारी में खुली पोल

मामला संज्ञान में आते ही जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) ने तीन इंस्पेक्टरों की एक संयुक्त कमेटी बनाकर मौके पर तफ्तीश के लिए भेजा। जांच दल ने जब राशन दुकान का ताला खुलवाकर भीतर का मुआयना किया, तो वहां भारी लापरवाही के सबूत मिले। डिपो के अंदर 20 कट्टे चीनी और 25 से अधिक बोरी गेहूं पूरी तरह पानी में डूबे और सड़े हुए पाए गए। इसके साथ ही वहां रखी सरसों के तेल की बोतलों पर भी गंदा कीचड़ जमा था, जिसके कारण दुकान से तेज बदबू आ रही थी और अधिकारियों को मास्क पहनकर पड़ताल करनी पड़ी।

संचालक और अधिकारी का बयान

पूरे मामले पर अपनी सफाई देते हुए डिपो संचालक नगरमल ने स्वीकार किया कि 7 जुलाई को हुई भारी बरसात के कारण चौपाल में पानी जमा हो गया था, जिससे राशन को नुकसान पहुंचा। संचालक के मुताबिक वह भीगे हुए अनाज को सुखा रहा था और उसने इस संकट की जानकारी विभाग को दे दी थी, जिसके बाद अब सरकार जो भी वित्तीय भरपाई तय करेगी, वह उसे देने को तैयार है। वहीं मौके पर मौजूद खाद्य निरीक्षक बृजमोहन ने बताया कि उन्होंने निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे आगे की दंडात्मक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को भेजा जा रहा है।