जीतेन्द्र सिन्हा, गरियाबंद। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा और सड़कों पर उमड़ा लोगों का हुजूम… इसी बीच जब दर्जनों जहरीले सांप शोभायात्रा का हिस्सा बने तो हर किसी की नजरें थम गईं। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के ग्राम देवरी में ऋषि पंचमी पर ऐसी अनोखी परंपरा देखने को मिली, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए। यहां सांवरा समाज के लोग विधि-विधान से सर्पों की पूजा करते हैं और इसके बाद पूरे गांव में उनकी शोभायात्रा निकालते हैं।

वर्षों से चली आ रही है परंपरा
दरअसल, गरियाबंद के राजिम इलाके के ग्राम देवरी में वर्षों से ऋषि पंचमी के दिन सर्प पूजा और शोभायात्रा निकालने की परंपरा चली आ रही है। सांवरा समाज के लोग विधि-विधान से सर्पों की पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद ढोल-नगाड़ों की थाप पर पूरे गांव में शोभायात्रा निकाली जाती है। इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए सांवरा समाज के लोगों के साथ-साथ आसपास और दूर-दराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

इस आयोजन की खास बात यह है कि यहां सांपों को केवल पूजा की परंपरा से नहीं जोड़ा गया है, बल्कि सर्पदंश से बचाव और उपचार की जानकारी भी दी जाती है। गांव में स्थित गुरु सांवरा पाठशाला में सालभर सर्पदंश के उपचार को लेकर ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जाता है। ऋषि पंचमी के अवसर पर इसी प्रशिक्षण का दीक्षांत समारोह भी आयोजित किया जाता है।
पूजा के बाद सर्पों को जंगल में छोड़ने की परंपरा
परंपरा के मुताबिक, पूजा और धार्मिक आयोजन पूरा होने के बाद सर्पों को वापस जंगल में छोड़ दिया जाता है, ताकि उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित लौटाया जा सके।
देखिए जहरीले सांपों की शोभायात्रा का वीडियो-
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