पटना। ​बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के मद्देनजर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर का असंतोष अब सतह पर आ गया है। पूर्व मंत्री और पार्टी के SC-ST प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवचंद्र राम ने टिकट न मिलने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।

​अधिकारों की अनदेखी का आरोप

शिवचंद्र राम ने टिकट न मिलने पर पार्टी नेतृत्व पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वे भावुक होकर फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें MLC बनाने का आश्वासन दिया था लेकिन अंतिम समय में उन्हें दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल उनका व्यक्तिगत मामला नहीं बल्कि दलित और रविदास समाज की उपेक्षा है, जिससे समुदाय में भारी निराशा है। मानसिक तनाव के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

​तेज प्रताप और रोहिणी का खुला समर्थन

पार्टी के इस निर्णय के खिलाफ स्वर उठने लगे हैं। लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने शिवचंद्र राम के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस इस्तीफे को पार्टी के लिए दुखद बताया है। वहीं, लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भी सुनील सिंह की उम्मीदवारी पर सवाल खड़े करते हुए तेजस्वी यादव को घेरा है। रोहिणी ने तंज कसते हुए पूछा है कि क्या पार्टी में अब कोई अन्य योग्य नेता नहीं बचा है?

​बड़ा राजनीतिक समीकरण और दलित कार्ड

इस बार के MLC चुनाव में चर्चा थी कि तेजस्वी यादव दलित कार्ड खेलेंगे। बिहार में सत्ता पक्ष के दलित मंत्री को बंगला नहीं देने के दांव की काट के लिए शिवचंद्र राम को एक मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा था। जानकारों का मानना है कि उन्हें उम्मीदवारी न देकर राजद ने एक बड़ा राजनीतिक अवसर खो दिया है।
शिवचंद्र राम ने अपने इस्तीफे में कहा कि उनके मन में लालू-राबड़ी परिवार के प्रति कोई कटुता नहीं है, लेकिन समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को देखते हुए इस पद पर बने रहना उनके लिए नैतिक रूप से संभव नहीं था। उन्होंने मांग की है कि पार्टी को दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। यह घटना राजद के भीतर बढ़ते मतभेदों और नेतृत्व की कार्यशैली पर उठते सवालों को स्पष्ट करती है।