रोहित कश्यप, मुंगेली। नगर पंचायत जरहागांव के मानियारी जलाशय योजना के अंतर्गत जरहागांव माइनर नहर से निकलने वाली माइनर नहर लाइन रोड इन दिनों किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। कच्ची सड़क बारिश के बाद पूरी तरह दलदल और कीचड़ में तब्दील हो गई है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे होने के कारण किसानों को खेतों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खेती-किसानी के समय में खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री खेतों तक पहुंचाना किसानों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

स्थिति यह है कि सड़क की खराब हालत के चलते किसानों को करीब दो किलोमीटर तक खाद और बीज सिर पर लादकर ले जाना पड़ रहा है। चारपहिया और अन्य वाहनों का इस मार्ग से गुजरना मुश्किल हो गया है। ऐसे में किसान अपने कृषि कार्य के लिए जरूरी सामग्री स्वयं उठाकर खेतों तक पहुंचाने को मजबूर हैं। सड़क की बदहाली के कारण कई किसानों के लिए समय पर खेतों तक खाद-बीज पहुंचाना मुश्किल हो गया है, जिससे खेती-किसानी प्रभावित हो रही है।

बार-बार मांग के बावजूद नहीं बनी सड़क

स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि इस सड़क के पक्कीकरण की मांग लंबे समय से की जा रही है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण को लेकर अपनी आवाज भी जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। बारिश के दिनों में समस्या और ज्यादा गंभीर हो जाती है और पूरी सड़क कीचड़ व दलदल में तब्दील हो जाती है।

कीचड़ में धान लगाकर किसानों ने जताया विरोध

सड़क की बदहाली से नाराज किसानों ने अनूठे तरीके से विरोध दर्ज कराया। किसानों ने कीचड़ और दलदल से भरी कच्ची सड़क पर बने गड्ढों में धान के पौधे लगाकर अपना आक्रोश जताया। किसानों का कहना है कि जिस सड़क पर लोगों और वाहनों का आवागमन होना चाहिए, वहां पानी और कीचड़ के कारण धान की फसल लगाने जैसी स्थिति बन गई है। विरोध के जरिए किसानों ने जिम्मेदारों का ध्यान सड़क की बदहाल स्थिति की ओर आकर्षित कराया है।

दर्जनभर गांवों के लिए अहम है यह मार्ग

बताया जा रहा है कि मानियारी जलाशय योजना के अंतर्गत जरहागांव माइनर नहर से निकलने वाला यह मार्ग आसपास के करीब दर्जनभर गांवों के लोगों के आवागमन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इस सड़क का निर्माण हो जाता है तो आसपास के ग्रामीणों को काफी राहत मिलेगी। वर्तमान में जिन लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए करीब 15 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, सड़क बन जाने के बाद वही दूरी घटकर महज 4 से 5 किलोमीटर रह जाएगी।

ग्रामीणों को बड़ी राहत की उम्मीद

स्थानीय लोगों के अनुसार यह माइनर नहर लाइन तहसील की ओर जाने वाले क्षेत्र से जुड़ती है। ऐसे में सड़क का पक्कीकरण केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के ग्रामीणों के लिए भी आवागमन का महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग साबित हो सकता है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द इसका निर्माण और पक्कीकरण कराया जाए। किसानों का कहना है कि खेती-किसानी के समय खाद, बीज और कृषि उपकरण खेतों तक पहुंचाने में उन्हें हो रही परेशानी को देखते हुए सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं सड़क बन जाने से आसपास के दर्जनभर गांवों के लोगों को आवागमन में बड़ी सहूलियत मिलने के साथ दूरी और समय दोनों की बचत होगी।

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