कुंदन कुमार, पटना। हाल ही में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर हुए स्याही फेंकने के मामले ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की प्रमुख नेत्री रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के माध्यम से तीखी प्रतिक्रिया दी है। रोहिणी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नेहा पर किया गया यह हमला महज़ एक युवा नेत्री पर व्यक्तिगत आघात नहीं है, बल्कि यह देश के उन तमाम नौजवानों और छात्रों के देशव्यापी संघर्ष व आंदोलन पर सुनियोजित हमला है जो अपनी हक और हुकूक की लड़ाई मजबूती से लड़ रहे हैं।
रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी के चेहरे पर स्याही फेंकना विरोध दर्ज कराने का लोकतांत्रिक या वैधानिक तरीका कतई नहीं हो सकता। यह सीधे तौर पर देश के जागरूक छात्रों एवं युवाओं को डराने, धमकाने और उन्हें अपमानित करने का एक बेहद अलोकतांत्रिक और घृणित तरीका है। मौजूदा दौर में संवाद, चर्चा और समस्याओं के तार्किक समाधान की संस्कृति को दरकिनार कर प्रतिशोध की भावना को प्राथमिकता दी जा रही है, जो भारतीय लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।
नेहा बोरा केवल एक राजनीतिक या छात्र संगठन की युवा नेत्री मात्र नहीं हैं, बल्कि वे आज के समय में अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले देश के लाखों जागरूक नौजवानों की प्रेरणा स्रोत और रोल-मॉडल बन चुकी हैं। रोहिणी ने विश्वास जताया कि इस प्रकार की ओछी मानसिकता और प्रतिशोध की स्याही से न तो नेहा का जुझारू और संघर्षशील चेहरा कभी मलीन हो पाएगा और न ही नेहा सहित देश के करोड़ों युवाओं के बुलंद हौसलों को डिगाया जा सकता है।
दिल्ली और बिहार जैसे प्रमुख राज्यों में हाल के दिनों में छात्रों और युवाओं पर हुए विभिन्न बर्बर हमलों का जिक्र करते हुए रोहिणी आचार्य ने कहा कि नेहा पर हुआ यह स्याही कांड इस कड़वी सच्चाई को एक बार फिर प्रमाणित करता है कि जब समाज या सत्ता में असहमति जताने का तरीका हमलावर हो जाए, तो वह सीधे तौर पर देश की लोकतांत्रिक मर्यादाओं के तीव्र पतन का स्पष्ट संकेत होता है। देश के युवाओं को इस दमनकारी सोच के खिलाफ एकजुट होकर वैचारिक और लोकतांत्रिक प्रतिरोध जारी रखना होगा।


