भागलपुर। बिहार की शिक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयां देने के लिए राज्य सरकार ने कई बड़े और क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। पटना के ज्ञान भवन में संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान के दौरान सरकार ने शिक्षा, विकास और सामाजिक समरसता को लेकर कई अभूतपूर्व घोषणाएं की हैं।

​शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होंगी ये घोषणाएं

​सरकार ने यह सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया है कि राज्य के किसी भी छात्र को उच्च शिक्षा के लिए पलायन न करना पड़े:

  • ​400 से अधिक नए डिग्री कॉलेज: बिहार में पहले ही 211 नए डिग्री कॉलेज खोले जा चुके हैं, और अब उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए 400 से अधिक नए डिग्री कॉलेज और स्थापित किए जाएंगे।
  • ​भागलपुर में AI यूनिवर्सिटी: तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भागलपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।
  • ​साहित्य विश्वविद्यालय का निर्माण: महान राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर एक विशेष साहित्य विश्वविद्यालय बनाया जाएगा।
  • ​विक्रमशिला विश्वविद्यालय का जीर्णोद्धार: ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय की तर्ज पर प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा और गरिमा को जमीन पर पुनर्जीवित किया जाएगा।
  • ​तेज होगी शिक्षक नियुक्ति: शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आगामी 10 अगस्त से शिक्षकों की नियुक्ति और बहाली की प्रक्रिया को और अधिक तेज किया जाएगा।
  • ​सरकारी स्कूलों का कायाकल्प:
  • सरकार ने अगले दो वर्षों में ऐसा उत्कृष्ट शैक्षणिक माहौल तैयार करने का लक्ष्य रखा है जहां मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी भी अपने बच्चों को सरकारी मॉडल स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजें।

​स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड और सामाजिक सहभागिता

​छात्रों की वित्तीय बाधाओं को दूर करने के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लगभग 18,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, ताकि यहां के विद्यार्थी देश के अन्य राज्यों के प्रतिष्ठित संस्थानों में भी उच्च शिक्षा हासिल कर सकें। इसके साथ ही, राज्य के सभी मठों और मंदिरों से अपील की गई है कि वे अपने आसपास के स्कूलों और कॉलेजों को गोद लें, जिसमें सरकार पूरा सहयोग देगी।

​पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ेंगी नई सड़कें

​राज्य के बुनियादी ढांचे को सांस्कृतिक पहचान देने के लिए प्रमुख सड़कों के नाम ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों पर रखे गए हैं:

  • ​विश्वामित्र पथ: पटना से बक्सर तक के मार्ग का नामकरण।
  • ​अंबिका पथ: गंगा नदी के पार बनने वाले नए मार्ग का नाम।
  • ​नारायणी पथ: गोपालगंज में भगवान नारायणी के नाम पर सड़क का निर्माण।

​समरसता संकल्प और संत रविदास का संदेश

​कार्यक्रम के दौरान समाज में एकता और सद्भाव का संदेश देने के लिए संत रविदास की जन्मस्थली से लाई गई पवित्र मिट्टी को बिहार की सभी पंचायतों, मठों और मंदिरों तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने जोर दिया कि कोई भी व्यक्ति जन्म से नहीं, बल्कि अपने अच्छे कर्मों से महान बनता है। इस प्रकार सरकार शिक्षा, संस्कृति और समरसता के त्रिवेणी प्रवाह से बिहार को एक सशक्त राज्य बनाने की दिशा में अग्रसर है।