Bihar News: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘दिमागी नक्सली’ वाली टिप्पणी पर घमासान मच गया है। एक तरफ जहां, विपक्षी नेता इसे विपक्षी नेताओं का अपमान बता रहे हैं। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि पीएम मोदी ने देश के युवाओं को दिमागी नक्सली कहा है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने पीएम मोदी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, यह सरासर अहंकार है और अब बदलाव की घंटी बज चुकी है। वहीं, पीएम मोदी के इस बयान पर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य की भी प्रतिक्रिया सामने आई है।

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया एक्स पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट करते हुए लिखा, अपनी आदत से मजबूर प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से एक दफा फिर कोरी लफ्फाजी करते सुने गए।

रोहिणी ने लिखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए अपने आज के संबोधन में 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लिए 7 स्तंभों (‘सप्तधारा’ – मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, टेक्नोलॉजी, गति शक्ति, रक्षा, ग्रीन इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर) का बड़ा लुभावना खाका तो पेश किया , मगर दूरगामी लक्ष्यों और विज़न की तुलना में वर्तमान समय की बुनियादी समस्याओं जैसे बेरोजगारी, देश के युवाओं – छात्रों की समस्याओं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव और जमीनी क्रियान्वयन (Implementation) पर कोई ठोस तात्कालिक समाधान की बात नहीं कर सके l प्रधानमंत्री का भाषण चुनावी जुमलों सरीखा प्रतीत हुआ।

रोहिणी आचार्य ने कहा कि, प्रधानमंत्री ने रक्षा और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बातें तो की , मगर इन क्षेत्रों में तकनीकों, कच्चे माल और सप्लाई चेन के संदर्भ में विदेशी निर्भरता कब ख़त्म होगी, ये बताने से पूरी तरह से बचते दिखे। लेकिन उन्होंने अपने भाषण में वैश्विक आर्थिक दबावों और ईंधन संकट के असर से आम जनता को बचाने की बातें भी कीं, मगर आम नागरिक और मध्यम वर्ग के लिए प्रत्यक्ष कर राहत या दैनिक महंगाई से निजात दिलाने वाले किसी बड़े आर्थिक कदम का जिक्र नहीं कर सके। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री के द्वारा तात्कालिक और रोजमर्रा की आर्थिक चिंताओं पर प्रकाश नहीं डाला जाना , देश की अधिसंख्य आबादी के लिए चिंता का विषय है l

रोहिणी ने कहा कि, अपने संबोधन में प्रधानमंत्री के द्वारा ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का प्रयोग सीधे तौर पर देश के युवाओं – छात्रों – प्रदर्शनकारियों – आंदोलनकारियों के लिए प्रयोग किया गया बेहद आपत्तिजनक शब्द है और इससे साफ़ जाहिर होता है कि सरकार की नीतियों, सरकार के गलत कामकाज की आलोचना करने वालों के प्रति प्रधानमंत्री दुर्भावना से ग्रस्त हैं l प्रधानमंत्री जी को ये बताना चाहिए कि सरकार पर सवाल उठाने वाले किस दृष्टिकोण से ‘दिमागी नक्सल’ हैं?

रोहिणी आचार्य ने पीएम मोदी से पूछा कि क्या नीट परीक्षा की धांधली का विरोध करने वाले छात्र दिमागी नक्सल हैं? क्या NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्र ‘दिमागी नक्सल’ हैं? क्या सरकार के दावों और वादों पर घेराबंदी करने वाले देश के किसान ‘दिमागी नक्सल’ हैं.? क्या सरकार की शिक्षा और परीक्षा नीति के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लाखों बेरोजगार युवा ‘दिमागी नक्सल’ हैं ? क्या सरकार की हां में हां नहीं मिलाने वाले लाखों – करोड़ों लोग ‘दिमागी नक्सल’ हैं?

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