अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। एक तरफ जहां पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-स्पीड इंटरनेट के युग में तेजी से डिजिटल हो रही है, वहीं बिहार के रोहतास जिले के दक्षिणी पहाड़ी इलाके आज भी बुनियादी संचार सेवाओं के लिए तरस रहे हैं। जिले के चेनारी और नौहट्टा प्रखंड के कई जंगली व पहाड़ी क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह गायब है। दूर-दूर बसे इन इक्के-दुक्के गांवों के लोगों के लिए आज भी किसी से संपर्क साधना किसी चुनौती से कम नहीं है।

​पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर असर

​रोहतास का यह दक्षिणी भू-भाग प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां रोहतासगढ़ किला, चौरासन मंदिर, प्रसिद्ध गुप्ता धाम और महादेव खोह जैसे कई प्रमुख पर्यटन स्थल मौजूद हैं। हालांकि, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी के पूरी तरह फेल होने के कारण दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। नेटवर्क न होने की वजह से कई पर्यटक इन ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचने से कतराते हैं, जिससे क्षेत्र के पर्यटन विकास को भी बड़ा झटका लग रहा है।

​विधायक ने संचार मंत्री और BSNL को लिखा पत्र

​दुर्गम भौगोलिक स्थिति और घने जंगलों के कारण दूरसंचार कंपनियों के लिए यहां मोबाइल टावर लगाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर लगातार बढ़ रही इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए चेनारी के विधायक मुरारी प्रसाद गौतम ने कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने भारत सरकार के संचार मंत्री और भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर इन उपेक्षित क्षेत्रों में तत्काल मोबाइल टावर लगवाने की मांग की है।

​विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की उम्मीद

​स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यदि जल्द ही इन पहाड़ी इलाकों में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जाता है, तो न केवल आम जनता की संपर्क से जुड़ी दशकों पुरानी समस्या दूर होगी, बल्कि रोहतास के इन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर पर्यटन को भी एक नया पंख मिल सकेगा। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार और BSNL इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं।