संजय विश्वकर्मा, उमरिया। मध्यप्रदेश के उमरिया जिले से एक वीडियो सामने आया है। जिसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत 14 गाड़ियों के काफिले के साथ जाते हुए दिखाई दिए। ऐसे में अब सवाल उठ रहे है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेट्रोल-डीजल बचाने का आह्वान क्या सिर्फ आम जनता के लिए है ? वहीं इसे लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक बहस भी शुरू हो गई है। साथ ही ईंधन बचत और वीआईपी कल्चर को लेकर भी सवाल भी उठ रहे हैं।
वीआईपी कल्चर पर उठ रहे सवाल
वैश्विक संकट के बीच देशभर में कोने-कोने से पेट्रोल-डीजल की कमी की तस्वीरें सामने आ रही है। इस बीच संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत का एक वीडियो सामने आया। जिसमें वे मध्य प्रदेश के उमरिया जिले से 14 गाड़ियों के काफिले के साथ गुजरते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद इस पर सवाल उठ रहे है कि जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल-डीजल की बचत, कम ईंधन खपत को लेकर आम जनता से अपील की हैं, तो क्या ये संदेश सिर्फ आम लोगों के लिए ही है ?
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शहडोल में स्वयं सेवकों के विकास वर्ग में शामिल होंगे संघ प्रमुख
हालांकि, सुरक्षा प्रोटोकॉल और वीआईपी मूवमेंट को लेकर तय नियमों के तहत कई बार बड़े काफिलों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन वैश्विक संकट के बीच इस मामले पर सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे है। साथ ही ईंधन बचत और वीआईपी कल्चर को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शहडोल में आयोजित मध्य प्रदेश-छतीसगढ़ के 383 स्वयं सेवकों के विकास वर्ग में शामिल होंगे।
कटनी से सड़क मार्ग के जरिए पहुंचे शहडोल
डॉ मोहन भागवत बुधवार सुबह कटनी तक ट्रेन से, इसके बाद सड़क मार्ग के जरिए शहडोल पहुंचे। संघ प्रमुख के पहली बार शहडोल आगमन को लेकर जिले में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है। उनके दौरे को देखते हुए पूरा प्रशासन हाईअलर्ट मोड पर है। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), स्पेशल ब्रांच, जिला पुलिस और आसपास के जिलों से आने वाले अधिकारियों ने शहडोल में डेरा डाल दिया है। डॉ मोहन भागवत को Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 350 अधिकारी-कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिनमें DSP रैंक के अधिकारी, CISF की विशेष टुकड़ी और विभिन्न जिलों से बुलाए गए पुलिस बल शामिल हैं।

