वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। हाईकोर्ट ने सूरजपुर जिले के एक सरकारी स्कूल के व्याख्याता की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता शिक्षक ने अपने खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा है कि मामला एक नाबालिग छात्रा से जुड़ा है और प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध है, इसलिए जांच के शुरुआती चरण में कानूनी प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता।

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जानकारी के अनुसार, सूरजपुर जिले के भटगांव शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में याचिकाकर्ता शिक्षक हरकेश जायसवाल वर्ष 2008 से जीव विज्ञान के व्याख्याता के पद पर पदस्थ हैं। उनके खिलाफ भटगांव पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) की धारा 75 (1) (iii) और पास्को एक्ट की धारा 8 के तहत एफआईआर दर्ज की।

झूठी शिकायत दर्ज कराने का लगाया आरोप

याचिका में कहा गया कि शिक्षक बीते 17 वर्षों से सेवारत है और इसी स्कूल में उनकी पत्नी भी लेक्चरर हैं। आज तक उनके खिलाफ किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं आई है। याचिका में कहा गया कि जब शिक्षक 1 अप्रैल 2026 को अपने बच्चों की नीट परीक्षा की तैयारी के सिलसिले में कोटा (राजस्थान) गए हुए थे, तब उनके ही एक सहकर्मी शिक्षक ने आपसी और विभागीय रंजिश के चलते कुछ छात्रों और अभिभावकों को उनके खिलाफ भड़काकर यह झूठी शिकायत दर्ज कराई।

एफआईआर में देरी को बनाया आधार

याचिकाकर्ता के अनुसार, कथित घटना 16 फरवरी 2026 की बताई गई है, जबकि इसकी रिपोर्ट करीब 50 दिनों के विलंब से 6 अप्रैल 2026 को दर्ज कराई गई, जो पूरी कहानी पर संदेह पैदा करती है। याचिका में कहा गया कि भरी क्लास में ऐसी घटना होना व्यावहारिक रूप से असंभव है।

शासन ने किया याचिका का विरोध

शासन की ओर से डिप्टी गर्वनमेंट एडवोकेट सौम्या राय ने कहा कि मामला एक नाबालिग छात्रा से जुड़े यौन उत्पीड़न से संबंधित है। ऐसे गंभीर मामलों में महज एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी को आधार बनाकर पूरी कार्रवाई को रद्द नहीं किया जा सकता। सच क्या है, यह केवल पुलिस की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकता है।

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