RSS On Pakistan: पुलवामा आतंकी हमले के एक वर्ष पूरे होने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस ने पाकिस्तान पर यू-टर्न मारा है। आरएसएस ने केंद्र सरकार से पाकिस्तान (Pakistan) से बातचीत और खेल-व्यापार जारी रखने की वकालत की है। हालांकि पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकी हमले का मजबूती से जवाब देने की बात कही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बयान ऐसे समय में आया है, जब पहलगाम आतंकी हमला (Pahalgam terror attack) और ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के एक वर्ष पूरे होने पर खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने (PM Narendra Modi) पाकिस्तान के साथ खून और पानी एक साथ नहीं बहने की बात दोहराई थी।

न्यूज एजेंसी PTI को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के राष्ट्रीय महासचिव दत्तात्रेय होसबाले (Dattatreya Hosabale) ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। दोनों देशों को एक-दूसरे को वीजा भी देना चाहिए। खेलकूद और व्यापार भी होना चाहिए। लेकिन पुलवामा जैसे हमले का जवाब भी मजबूती से देना होगा।

होसबाले ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंध पुराने हैं और हम एक ही राष्ट्र रहे हैं। राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व पर भरोसा कम होने के कारण पाकिस्तान के खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों और सिविल सोसायटी को आगे आना चाहिए। संघ महासचिव ने कहा कि पाकिस्तान साथ ही हमें बातचीत के दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए। हमें हमेशा बातचीत के लिए तैयार रहना चाहिए। व्यापार और कॉमर्स, वीजा जारी करना बंद नहीं होना चाहिए, क्योंकि बातचीत के लिए हमेशा एक खिड़की खुली रहनी चाहिए। इसीलिए डिप्लोमैटिक संबंध बनाए रखे गए हैं। वहां के शिक्षाविदों, खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों को आगे आना चाहिए। अगर पाकिस्तान पुलवामा जैसी हरकत करता है, तो देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए भारत को हालात के मुताबिक जवाब देना होगा।

सनातन शाश्वत है, किसी के बोलने से यह खत्म नहीं होगा

उदयनिधि स्टालिन ने सनातन खत्म करने के सवाल पर होसबाले ने कहा कि सनातन शाश्वत है, सिर्फ इसलिए गायब नहीं हो जाएगा क्योंकि कोई कहता है कि इसे खत्म कर देना चाहिए।

भारत हिंदू राष्ट्र पहले से है, इसे बनाने की जरूरत नहीं

वहीं मुस्लिमों को कैसे भरोसा दिलाया जा सकता है कि वे इंडिया में सेफ हैं और हिंदू राष्ट्र का मतलब कल्चरल से है न कि धर्म से? इसके जवाब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महासचिव ने कहा कि हम हिंदू राष्ट्र बना नहीं रहे हैं, यह पहले से हिंदू राष्ट्र है। ब्रिटिश शासन के समय भी यह हिंदू राष्ट्र ही था। हिंदू राष्ट्र का अर्थ सांस्कृतिक पहचान से है, न कि धार्मिक राज्य से। धर्म परिवर्तन से राष्ट्रीयता नहीं बदलती। जब राष्ट्रीयता एक है तो हम किसी को अलग नहीं मानते। भारत में मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं माना जाता। सरकारी योजनाओं का लाभ सभी तक पहुंच रहा है और RSS लगातार अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं से बात करता है।

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