विकास कुमार/सहरसा। बिहार सरकार के मंत्री रत्नेश सादा और सहरसा के एडीएम निशांत कुमार पर लगाए गए आरोपों ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है। इन आरोपों के जवाब में एनडीए ने मोर्चा खोलते हुए इसे विपक्ष द्वारा रची गई एक गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया है। स्थानीय परिसदन में आयोजित एक संयुक्त प्रेसवार्ता के दौरान एनडीए के वरिष्ठ नेताओं ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा।
एनडीए नेताओं का कड़ा रुख
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए जदयू जिलाध्यक्ष गूंजेश्वर साह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मंत्री रत्नेश सादा और एडीएम निशांत कुमार पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। उन्होंने बताया कि इन आरोपों की आधिकारिक जांच पहले ही पूरी हो चुकी है जिसमें ये सभी आरोप गलत और तथ्यहीन पाए गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार के बेबुनियाद आरोपों का उद्देश्य केवल सरकार की कार्यप्रणाली को बाधित करना और विकास कार्यों से जनता का ध्यान भटकाना है।
विपक्ष पर राजनीतिक द्वेष का आरोप
पूर्व विधायक डॉ. आलोक रंजन ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए इसे राजनीतिक द्वेष की पराकाष्ठा बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है इसलिए वे प्रशासन और सरकार की छवि को धूमिल करने के लिए अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। डॉ. रंजन ने कहा जनता सब देख रही है। एनडीए सरकार विकास के पथ पर अग्रसर है और इस तरह की ओछी राजनीति से हमारी सरकार या प्रशासन की विश्वसनीयता कम नहीं होगी।
सुनियोजित साजिश का दावा
एनडीए के अन्य नेताओं ने भी इस प्रकरण को एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए संवैधानिक पदों और लोकसेवकों को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर विपक्ष ने अपनी इस नकारात्मक राजनीति को बंद नहीं किया तो एनडीए इसे जनता के बीच ले जाकर इसका मुंहतोड़ जवाब देगी।
इस घटनाक्रम ने सहरसा के सियासी गलियारों में बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर एनडीए ने एकजुटता दिखाते हुए अपने नेता और प्रशासनिक अधिकारियों का बचाव किया है वहीं दूसरी ओर विपक्ष की चुप्पी और उनके आरोपों पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। फिलहाल सहरसा में यह विषय चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

