विकास कुमार/सहरसा। अपनी जायज मांगों के समर्थन में बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के बैनर तले जिले के शिक्षकों ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को सहरसा जिला पदाधिकारी (DM) कार्यालय के समक्ष भारी संख्या में जुटे शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। राज्य सरकार की उपेक्षापूर्ण नीतियों के खिलाफ शिक्षकों का गुस्सा साफ नजर आ रहा था। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार विरोधी नारेबाजी की और जल्द से जल्द अपनी लंबित मांगों को पूरा करने की पुरजोर मांग की।

​प्रमुख मांगें: प्रोन्नति और स्थानांतरण की दरकार

​धरना स्थल पर मौजूद शिक्षकों ने एक स्वर में अपनी समस्याओं को सरकार के सामने रखा। संघ के जिला अध्यक्ष निरंजन कुमार ने स्पष्ट किया कि शिक्षक लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार केवल आश्वासन दे रही है। उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं:

  • ​लंबित प्रोन्नति: नियमावली में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद नियोजित शिक्षकों को प्रोन्नति का लाभ नहीं मिल रहा है, जिससे शिक्षकों में भारी निराशा है।
  • ​ऐच्छिक स्थानांतरण: शिक्षक लंबे समय से ऐच्छिक स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं ताकि वे अपने गृह क्षेत्रों के करीब कार्य कर सकें लेकिन यह सुविधा अभी भी दूर की कौड़ी बनी हुई है।
  • ​चार माह का बकाया वेतन: सबसे गंभीर मुद्दा चार महीने से लंबित वेतन भुगतान का है। वेतन नहीं मिलने के कारण शिक्षकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और उनके परिवार की स्थिति दयनीय हो गई है।

​सरकार को अल्टीमेटम: विधानसभा घेराव की तैयारी

​प्रदर्शन के दौरान संघ के जिला अध्यक्ष निरंजन कुमार ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने शिक्षकों के सब्र की परीक्षा लेना बंद नहीं किया और जल्द ही इन मांगों का सकारात्मक समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन और उग्र होगा। उन्होंने ऐलान किया कि बिहार विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के दौरान राज्य भर के शिक्षक पटना पहुंचेंगे और विधानसभा का घेराव करेंगे।

​शिक्षक आक्रोश और भविष्य की रणनीति

​धरना प्रदर्शन में जिले भर से आए सैकड़ों शिक्षकों ने भाग लिया। शिक्षकों का कहना है कि वे केवल अपनी हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और सरकार को उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने साफ किया है कि जब तक वेतन का भुगतान नहीं होता और स्थानांतरण-प्रोन्नति की प्रक्रिया शुरू नहीं होती तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। इस प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में आने वाले दिनों में शिक्षक आंदोलन एक बड़ा रूप ले सकता है जिससे शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है।