इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. सम्पत सिंह ने हरियाणा सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों को तुरंत मानने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि हड़ताल से शहरों में स्वास्थ्य संकट गहरा सकता है।
प्रवीण कुमार, हिसार। हरियाणा के पूर्व मंत्री और इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. सम्पत सिंह ने प्रदेश की “ट्रिपल इंजन सरकार” की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया है। सोमवार को हिसार नगर निगम में पिछले 11 दिनों से हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश के शहरों में गंदगी और कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, लेकिन सरकार पूरी तरह से निष्क्रिय बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की हठधर्मिता और उदासीनता के कारण प्रदेश के 88 नगर निगमों, परिषदों और समितियों के लगभग 40 हजार सफाई कर्मचारी सड़कों पर हैं, जिससे आम जनता का जीवन दूभर हो गया है।

शहरों में गहराया संकट और कर्मचारियों की दयनीय स्थिति
प्रो. सम्पत सिंह ने विस्तार से बताते हुए कहा कि हड़ताल के कारण सीवरेज जाम होने से गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। नगर निगमों में जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक कार्य पूरी तरह ठप हो चुके हैं। उन्होंने कर्मचारियों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि अप्रैल माह का वेतन न मिलने के कारण गरीब कर्मचारियों के घरों में चूल्हे बुझने की नौबत आ गई है और बच्चों की पढ़ाई व इलाज प्रभावित हो रहा है। इनेलो नेता ने “स्वच्छ भारत” और “स्मार्ट सिटी” जैसे अभियानों को महज एक दिखावा करार देते हुए कहा कि धरातल पर सफाई व्यवस्था दम तोड़ चुकी है।
सरकार को चेतावनी और प्रमुख मांगें
प्रो. सम्पत सिंह ने सरकार से मांग की कि वह तुरंत सफाई कर्मचारी नेताओं से वार्ता कर समाधान निकाले। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए ठेका प्रथा समाप्त करने, कर्मचारियों को नियमित करने और उनका न्यूनतम मासिक वेतन 30 हजार रुपये करने पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने फरीदाबाद अग्निशमन सेवा के दो मृतक कर्मचारियों को शहीद का दर्जा देने, उनके परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की सहायता और सरकारी नौकरी प्रदान करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो प्रदेश में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

