करनाल। हरियाणा के करनाल जिले के घरौंडा इलाके से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए फूड सेफ्टी विभाग की टीम ने आज शहर के तीन अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस औचक कार्रवाई के दौरान टीम ने जूस, फल, दूध, पनीर, मेवे और लस्सी के कई सैंपल भरे हैं। विभाग की इस अचानक हुई हलचल से बाजार के अन्य दुकानदारों में भी हड़कंप मच गया। अधिकारियों के मुताबिक इन सभी सैंपल्स को जांच के लिए चंडीगढ़ स्थित सरकारी लैब में भेज दिया गया है, जहां से करीब तीन हफ्ते के भीतर रिपोर्ट आ जाएगी।
सीएम विंडो पर मिली थी शिकायत
फूड सेफ्टी ऑफिसर डॉ. कपिला सैनी अपने सहायक सुरेंद्र कुमार और पूरी टीम के साथ आज अचानक घरौंडा के बाजारों में पहुंचीं। टीम ने अपनी कार्रवाई की शुरुआत रेलवे रोड पर स्थित गर्ग जूस शॉप से की। अधिकारियों ने बताया कि इस विशेष दुकान के खिलाफ किसी स्थानीय नागरिक ने मुख्यमंत्री शिकायत निवारण पोर्टल यानी सीएम विंडो (CM Window) पर गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए टीम ने यहां से मौसमी के जूस और केलों के सैंपल लिए। टीम ने दुकान में साफ-सफाई का भी जायजा लिया और दुकानदार को जरूरी हिदायत दी।
डेयरी और मिठाई की दुकान पर रूटीन चेकिंग
जूस की दुकान पर कार्रवाई पूरी करने के बाद फूड सेफ्टी विभाग की टीम विश्वकर्मा मंडी रोड की तरफ आगे बढ़ी। यहां स्थित यतिन डेयरी पर टीम ने जांच पड़ताल की और काउंटर पर रखे दूध और पनीर के सैंपल कलेक्ट किए। इसके बाद टीम ने फ्रूट मंडी के पास स्थित ओम स्वीट्स नाम की मशहूर मिठाई दुकान पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मिठाई की दुकान से टीम ने मावे और वहां बिक रही मीठी लस्सी के सैंपल पैकेट्स में सील किए। अधिकारियों ने साफ किया कि इन दोनों दुकानों पर रूटीन सैंपलिंग (Routine Sampling) यानी नियमित जांच के तहत ही यह कार्रवाई की गई है ताकि त्योहारों और आम दिनों में लोगों को शुद्ध चीजें मिल सकें।
लैब रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट में चलेगा केस
फूड सेफ्टी ऑफिसर डॉ. कपिला सैनी ने बताया कि सभी एकत्रित सैंपलों को तुरंत सील करके चंडीगढ़ मुख्य प्रयोगशाला में टेस्ट के लिए भिजवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग इक्कीस दिनों में इसकी फाइनल रिपोर्ट (Final Report) आ जाएगी। इसके बाद की कानूनी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझाते हुए उन्होंने कहा कि अगर जांच में सैंपल सब-स्टैंडर्ड यानी कम गुणवत्ता वाले पाए जाते हैं, तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ एडीसी कोर्ट में मामला चलाया जाएगा, जहां भारी जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, अगर लैब टेस्ट में कोई भी चीज अनसेफ यानी स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह असुरक्षित और हानिकारक पाई जाती है, तो दुकानदार के खिलाफ सीधे सीजेएम कोर्ट में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

