अभय मिश्रा, मऊगंज। मध्य प्रदेश के नवगठित मऊगंज सिविल अस्पताल से एक दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य महकमे की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अस्पताल के जनरल वार्ड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक गैर-प्रशिक्षित सफाईकर्मी महिला मरीजों को धड़ल्ले से इंजेक्शन लगाती और सलाइन चढ़ाती नजर आ रही है।

ये तस्वीरें मऊगंज जिला अस्पताल की है जहां की बदहाली का इलाज फिलहाल खुद सरकार के पास भी नजर नहीं आ रहा। अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती मरीजों की सांसें किसके भरोसे चल रही हैं, यह वायरल वीडियो उसकी गवाही दे रहा है। वीडियो में दिख रही यह महिला न तो कोई डॉक्टर है, न प्रशिक्षित नर्स और न ही कोई मेडिकल इंटर्न। यह अस्पताल की एक सफाईकर्मी है, जिसके कंधों पर वार्ड को साफ रखने की जिम्मेदारी है। लेकिन जरा देखिए, कितने बेखौफ अंदाज में यह महिला एक के बाद एक कई मरीजों को सुई चुभा रही है और सलाइन की बोतलें बदल रही है।

 जिन हाथों में झाड़ू और डस्टर होना चाहिए था, उनके हाथों में सिरिंज और सलाइन थमा दी गई। सवाल उठता है कि जब यह ‘मौत का खेल’ चल रहा था, तब अस्पताल का मोटा वेतन उठाने वाला नर्सिंग स्टाफ कहां था? ऑन-ड्यूटी डॉक्टर किस गहरी नींद में सो रहे थे? स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि यह कोई एक दिन का वाकया नहीं है, बल्कि मऊगंज जिला अस्पताल में यह रोज की कहानी है। स्टाफ की कमी या फिर अपनी सहूलियत के लिए, यहां के जिम्मेदार अधिकारी मरीजों की जिंदगी को अनाड़ी हाथों में सौंपकर खुद चैन की बंसी बजा रहे हैं।

मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो बिना ट्रेनिंग के नस में इंजेक्शन लगाना या सलाइन चढ़ाना सीधे तौर पर किसी की जान लेने जैसा है। एक मामूली सा एयर बबल (हवा का बुलबुला) भी मरीज की धड़कनें रोक सकता है। वीडियो वायरल होते ही अब प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।मऊगंज जिला अस्पताल का यह मामला सिर्फ एक वीडियो के वायरल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस चरमराई हुई और संवेदनहीन स्वास्थ्य व्यवस्था का कड़वा सच है, जिसे इस देश का गरीब तबका रोज भुगतता है। 

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मरीजों की जिंदगी इतनी सस्ती है कि कोई भी आकर उनके साथ ‘एक्सपेरिमेंट’ कर जाए? जिस अस्पताल की चौखट पर लोग अपनी जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर आते हैं, अगर वहीं उनकी जान को दांव पर लगा दिया जाए, तो आम आदमी आखिर किस पर भरोसा करे? अब देखना यह होगा कि इस बार सिर्फ जांच की रस्म अदायगी करके फाइल बंद कर दी जाती है, या फिर अपनी जिम्मेदारी से भागने वाले डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर ऐसी कार्रवाई होगी जो मिसाल बने।

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