काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस समारोह के दौरान अभिनेता संजय मिश्रा ने विद्यार्थियों से अपने करियर, संघर्ष और असफलता को लेकर अनुभव साझा किए. उन्होंने छात्रों से अपनी पहचान बनाए रखने, लगातार सीखते रहने और अवसर मिलने पर उसका पूरा लाभ उठाने की अपील की.
वाराणसी. स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा ने विद्यार्थियों से संवाद किया. विज्ञान संस्थान की हिंदी प्रकाशन समिति की ओर से महामना हाल में आयोजित कार्यक्रम में संजय मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, अपने करियर और जीवन में असफलता के अनुभवों को लेकर छात्रों से बातचीत की.
इतिहास को नए रूप में
संजय मिश्रा ने कहा कि इतिहास को केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे बड़े पर्दे पर भी प्रस्तुत किया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, इतिहास को नए रूप में देखने से युवा उससे प्रेरणा ले सकते हैं.
उन्होंने शिक्षा को तनाव के बजाय सीखने और समझने की प्रक्रिया के तौर पर लेने की सलाह विद्यार्थियों को दी. साथ ही लगातार अभ्यास करते रहने और नई चीजें सीखते रहने के महत्व पर जोर दिया.
अपनी पहचान न छोड़ें
बनारस से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए अभिनेता ने कहा कि वह बनारस को जीते और समझते हैं तथा इसे अपने जीवन का हिस्सा बना चुके हैं. उन्होंने कहा कि वह किसी दूसरे शहर को बनारस से छोटा नहीं कहना चाहते, लेकिन उनके लिए बनारस से बड़ा कोई शहर नहीं है.
विद्यार्थियों से बातचीत में उन्होंने अपनी पहचान को स्वीकार करने की बात कही. उन्होंने कहा कि व्यक्ति जैसा है, उसे वैसा ही रहना चाहिए और बनावटी जीवन जीने की जरूरत नहीं है.
असफलता से सीखने की सलाह
अभिनेता ने अपने स्कूल के दिनों को भी छात्रों के साथ साझा किया. उन्होंने विद्यार्थियों से असफलता से डरने के बजाय उससे सीख लेने की अपील की और कहा कि असफलता का अनुभव होने के बाद ही सफलता का वास्तविक अर्थ समझ में आता है.
उन्होंने अपने संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि संघर्ष व्यक्ति का अपना होता है और हर समय साथ देने वाला कोई नहीं होता. इसलिए अवसर मिलने पर उसका पूरा फायदा उठाना चाहिए.
मेहनत पर दिया जोर
संजय मिश्रा ने छात्रों से कहा कि जिस काम में उनकी रुचि हो, उसे पूरी ईमानदारी और लगन के साथ करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि पेशे को समय देना जरूरी है, लेकिन सफलता हासिल करने के बाद भी अपनी जमीन और पहचान को नहीं भूलना चाहिए.
उन्होंने विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने की सलाह दी. उनके मुताबिक, जीवन में प्रगति जरूरी है, लेकिन इसके लिए अपनी जमीन छोड़ना जरूरी नहीं है.



