अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। बिहार के सासाराम जिले की एक अदालत ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाले एक जघन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सासाराम के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-7 (ADJ-7) की अदालत ने 10 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी नृशंस हत्या के आरोपी बलराम सिंह को फांसी की सजा सुनाई है। इस फैसले ने न्याय की मिसाल पेश करते हुए क्षेत्र में एक कड़ा संदेश दिया है।

​घटना का विवरण

​यह दर्दनाक वाकया 15 नवंबर 2020 का है। डालमियानगर के गंगौली इलाके का रहने वाला आरोपी बलराम सिंह ने अपने पड़ोस में रहने वाली 10 साल की बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने की सोची। आरोपी ने बच्ची को बहला-फुसलाकर तस्वीर और एल्बम दिखाने के बहाने अपने कमरे में बुलाया। कमरे में ले जाने के बाद उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और सबूत मिटाने के उद्देश्य से उसकी हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने मासूम के शव को एक लकड़ी के बक्से में छिपा दिया।

​स्थानीय गवाहों ने खोली पोल

​घटना के समय स्थानीय लोगों ने बलराम सिंह को बच्ची के साथ उसके कमरे में जाते हुए देखा था जो जांच में सबसे अहम कड़ी साबित हुआ। ग्रामीणों की सतर्कता के चलते पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्यों को जुटाया और पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।

​अदालत का फैसला और न्याय की जीत

​सासाराम के सत्र न्यायाधीश-7 की अदालत में चली लंबी सुनवाई के दौरान कुल 11 गवाहों ने अपनी गवाही दर्ज कराई। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने बलराम सिंह को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाने के साथ ही मृतक बच्ची की मां को क्षतिपूर्ति के रूप में 1 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भरने का भी आदेश दिया है।
​स्पेशल पीपी हीरा प्रताप सिंह ने बताया कि पोक्सो एक्ट के तहत चल रहे इस मुकदमे में दुष्कर्म, हत्या और साक्ष्य छिपाने के पुख्ता सबूत मिलने पर माननीय न्यायालय ने यह कठोर सजा दी है। अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है और समाज में दोषियों के प्रति कानून का डर कायम हुआ है।