अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। मोहर्रम के पवित्र मौके पर सासाराम शहर में इस्लामी अकीदत और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शहर के विभिन्न अखाड़ों और इमामबाड़ों से ताजिया जुलूस पूरी भव्यता के साथ निकाला गया। पूरा शहर या हुसैन की गूंज से सराबोर रहा और अकीदतमंदों ने गमगीन माहौल में इबादत और मातम के जरिए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

​अखाड़ों में दिखा युवाओं का कौशल

​जुलूस का मुख्य आकर्षण विभिन्न अखाड़ों के युवाओं द्वारा किया गया पारंपरिक लाठी खेल और युद्ध कलाओं का प्रदर्शन रहा। युवाओं ने अपनी फुर्ती और कौशल का शानदार प्रदर्शन किया जिसे देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। चौखंडी, शेरगंज, बस्ती मोड़ और मोची टोला जैसे प्रमुख इलाकों से जब ताजिया का जुलूस गुजरा, तो स्थानीय लोगों ने अपनी बालकनियों और छतों से भी इस दृश्य को देखा। युवाओं का यह प्रदर्शन मोहर्रम की पुरानी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करता नजर आया।

​प्रशासन की कड़ी निगरानी

​इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन बेहद सतर्क दिखा। जुलूस के निर्धारित मार्गों पर पुलिस बल की व्यापक तैनाती की गई थी ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। सासाराम के अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) खुद सड़क पर उतरकर सुरक्षा व्यवस्था की पल-पल की निगरानी करते रहे। संवेदनशील इलाकों में विशेष पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए भी निगरानी रखी गई।

​शांति और सौहार्द का संदेश

​प्रशासन की तत्परता और अकीदतमंदों के सहयोग से ताजिया जुलूस पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में अपने निर्धारित मार्गों से आगे बढ़ता रहा। किसी भी तरह की अफवाहों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने पूरी सतर्कता बरती। जिला प्रशासन ने जुलूस में शामिल लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की थी, जिसका असर सासाराम की सड़कों पर साफ दिखाई दिया।
​मोहर्रम का यह त्यौहार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और संयम का संदेश भी देता है। देर शाम तक ताजिया का काफिला अपने गंतव्य की ओर बढ़ता रहा और प्रशासन की टीम अंत तक सुरक्षा घेरा बनाए रही। सासाराम वासियों ने एक बार फिर आपसी प्रेम और शांति का परिचय देते हुए मोहर्रम को गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न किया।