अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। रोहतास जिले के सासाराम से एक हैरान कर देने वाली और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाली खबर सामने आई है। सासाराम के मुख्य सदर अस्पताल परिसर स्थित इमरजेंसी वार्ड में एक मरीज का इलाज मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में किए जाने का मामला तूल पकड़ चुका है। इस गंभीर लापरवाही का वीडियो और खबर सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से इसका संज्ञान लिया है। रोहतास के जिलाधिकारी (DM) दीपक कुमार मिश्रा ने इस पूरी घटना की उच्चस्तरीय जांच के लिए एक विशेष जांच कमेटी का गठन कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रबंधन और लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

​मॉडल हॉस्पिटल की भव्य इमारत और जमीनी हकीकत

​एक तरफ जहां सासाराम सदर अस्पताल परिसर में आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘मॉडल हॉस्पिटल’ की एक विशाल और भव्य इमारत का निर्माण किया गया है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी और चिकित्सीय व्यवस्थाओं का बुरा हाल है। इस आधुनिक अस्पताल भवन के सुचारू संचालन के लिए विशेष रूप से एक अलग जनरेटर की व्यवस्था भी की गई है।
​लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और लचर व्यवस्था के कारण इसके संचालन में भारी खामियां देखने को मिल रही हैं। मुख्य समस्या यह है कि अस्पताल में जनरेटर ऑपरेटर की नियमित नियुक्ति नहीं की गई है। इसके चलते जब भी पावर कट होता है, जनरेटर को मैनुअली या ऑटोमैटिक शुरू होने में काफी देर हो जाती है।

​क्या थी तकनीकी खराबी और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष?

​अस्पताल के आपातकालीन कक्ष (इमरजेंसी वार्ड) में बिजली कटौती से निपटने के लिए इनवर्टर बैकअप की व्यवस्था पहले से ही मौजूद है। घटना वाले दिन अचानक बिजली कट गई थी और उसी दौरान कुछ गंभीर मरीजों का इलाज चल रहा था।
​अस्पताल सूत्रों और प्रबंधन के अनुसार, इनवर्टर की लाइन से पावर बैकअप दिया जाना तय था, लेकिन अचानक मुख्य एमसीबी (MCB) में कुछ तकनीकी खराबी आ गई। इस तकनीकी फॉल्ट के कारण पावर कट होते ही इनवर्टर सिस्टम फेल हो गया। हालांकि, प्रबंधन का यह भी दावा है कि बिजली कुछ ही क्षणों के लिए गुल हुई थी और तकनीकी सुधार के बाद तुरंत बिजली बहाल कर दी गई थी, लेकिन तब तक वहां अफरातफरी का माहौल बन चुका था।

​मरीजों की जान से खिलवाड़ और प्रशासन की चेतावनी

​अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर जहां जीवन और मौत के बीच जंग चलती है, वहां मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज होना स्वास्थ्य विभाग की बड़ी नाकामी को दर्शाता है। जरा सी चूक किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।
​डीएम दीपक कुमार मिश्रा द्वारा गठित जांच कमेटी इस बात की बारीकी से पड़ताल करेगी कि आखिरकार इनवर्टर फेल होने और जनरेटर समय पर चालू न होने के पीछे असली जिम्मेदार कौन था। रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है, जिससे भविष्य में इस तरह की अमानवीय लापरवाही दोबारा न दोहराई जाए।