अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। रोहतास जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल इन दिनों गंभीर बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के तमाम दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। अस्पताल परिसर में करोड़ों की लागत से निर्मित ‘मातृ-शिशु विंग’ (MCH) में पिछले कई हफ्तों से लिफ्ट बंद पड़ी है, जिसके कारण प्रसव पीड़ा से गुजर रही गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अमानवीय स्थिति: सीढ़ियों पर निर्भर मरीज
यह बहुमंजिला भवन विशेष रूप से जटिल प्रसव और नवजात शिशुओं के उपचार के लिए बनाया गया था, जहां लिफ्ट का सुचारू संचालन अनिवार्य है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता के कारण यह सुविधा लंबे समय से ठप है। इसका सीधा खामियाजा ग्रामीण इलाकों से आने वाली गरीब महिलाओं को उठाना पड़ रहा है। भर्ती होने या जांच के लिए गर्भवती महिलाओं को परिजनों के सहारे भीषण गर्मी में सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल मरीजों के लिए बेहद कष्टकारी है, बल्कि जोखिम भरी भी है। यदि समय रहते सीढ़ी चढ़ते वक्त कोई अनहोनी हो जाए, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
मीडिया के हस्तक्षेप के बाद जागा प्रशासन
इस संवेदनशील मुद्दे को मीडिया ने प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए रोहतास के सिविल सर्जन डॉ. मणिराज रंजन ने तुरंत संज्ञान लिया। सिविल सर्जन ने सफाई देते हुए कहा, लिफ्ट में तकनीकी खराबी थी, जिसे एहतियातन बंद रखा गया था। अब पटना से विशेष एक्सपर्ट्स की टीम को बुला लिया गया है। युद्ध स्तर पर मरम्मत का काम चल रहा है और अगले 48 घंटों के भीतर लिफ्ट को सुचारू कर दिया जाएगा।
सवाल: व्यवस्था कब सुधरेगी?
भले ही प्रशासन ने दो दिनों में सुधार का वादा किया हो, लेकिन इस घटना ने कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं:
- इतने संवेदनशील वार्ड में लिफ्ट खराब होने के बावजूद कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
- क्या स्वास्थ्य विभाग हमेशा किसी बड़े हादसे या मीडिया के दबाव का ही इंतजार करता है?
- करोड़ों की लागत से बनी मशीनों के मेंटेनेंस के लिए कोई स्थायी तंत्र क्यों नहीं है?
फिलहाल, सासाराम की जनता की निगाहें सिविल सर्जन के दावे पर टिकी हैं। क्या वास्तव में दो दिनों में राहत मिलेगी या मरीजों का यह दर्द प्रशासनिक फाइलों में ही दबा रहेगा? अब देखना यह है कि प्रशासन अपनी साख कितनी जल्दी बचा पाता है।

