अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। रोहतास जिले के मुख्यालय सासाराम स्थित सदर अस्पताल परिसर में स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों के लिए बनाया गया आधुनिक आवासीय परिसर बदहाली के भीषण दौर से गुजर रहा है। लगभग आठ साल पहले करीब 44 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम आज तक पूरा नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि उद्घाटन और उपयोग से पहले ही करोड़ों की यह सरकारी संपत्ति खंडहर में तब्दील होने की कगार पर पहुंच चुकी है।
अस्पताल परिसर में डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह योजना बनाई गई थी, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को तुरंत चिकित्सीय सहायता मिल सके। इस योजना के तहत साठ से अधिक फ्लैटों का निर्माण कराया जाना था, जिनमें से अधिकांश इमारतों का नब्बे प्रतिशत काम पूरा भी हो चुका है।
हालांकि, खिड़की-दरवाजे लगाने और अंतिम चरण के रंग-रोगन का कार्य अधूरा रह जाने के कारण भवन निर्माण विभाग ने इसे स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित नहीं किया। इस बीच, निर्माण कार्य करा रहा संबंधित संवेदक (ठेकेदार) भी बीच में ही काम छोड़कर फरार हो गया, जिसके बाद से पूरा प्रोजेक्ट ठप पड़ा है।
देखरेख के अभाव और प्रशासनिक सुस्ती के चलते अब इन अर्धनिर्मित बहुमंजिला इमारतों का इस्तेमाल स्थानीय लोग मवेशी बांधने के लिए कर रहे हैं। जिन कमरों में डॉक्टरों को रहना था, वहां आज मवेशियों को बांधा जा रहा है और परिसरों में बड़े पैमाने पर भूसा तथा चारा डंप किया जा रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह बहुमूल्य ढांचा अब असामाजिक तत्वों और पशुपालकों की शरणस्थली बन चुका है, जिससे सरकारी धन की बर्बादी का यह एक जीता-जागता उदाहरण सामने आया है।
इस पूरे मामले पर रोहतास के जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने संज्ञान लेते हुए बताया कि इस अधूरी पड़ी परियोजना को गति देने के लिए विभागीय स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है। इसके साथ ही निर्माण कार्य को सिरे चढ़ाने के लिए अतिरिक्त वित्तीय आवंटन की मांग भी की गई है। जिला प्रशासन का दावा है कि शेष बचे कार्यों को जल्द से जल्द पूरा कराकर इस आवासीय परिसर को चालू किया जाएगा, ताकि डॉक्टरों को उनकी कार्यप्रणाली के अनुरूप आवास मिल सके।


