अनमोल मिश्रा, सतना। मध्य प्रदेश के सतना में इन दिनों सरकारी हो या निजी डॉक्टर, मरीज की जान से खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहे है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। आरोप है कि निजी क्लिनिक संचालित करने वाले डॉक्टर ने गलत इलाज कर मासूम की जान जोखिम में डाल दी। शर्म की इंतहा तब हो गई जब बेबस गरीब परिजनों पर डॉक्टर का रसूख हावी हो गया। डॉक्टर की सुरक्षा में एक रिटायर पुलिस अधिकारी समेत भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और गरीब की आवाज को दबाने का खेल शुरू हुआ। घंटों चली कवायद के बाद जैसे तैसे डॉक्टर अपनी योजना में कामयाब हो गया और मासूम बच्ची और उनके परिजनों को कही और चलता कर दिया। फिर डॉक्टर ने अपने किए-कराये पर पर्दा डालना शुरू कर दिया।
सतना शहर के हॉस्पिटल चौक स्थित एक निजी क्लीनिक में गलत इलाज के दौरान चार वर्ष की मासूम बच्ची की जान आफत में पड़ गई है। हवाई पट्टी क्षेत्र की रहने वाली चार वर्षीय धानी सिसोदिया के परिजनों ने क्लीनिक संचालक डॉक्टर हेमंत पांडेय पर गलत इलाज करने और लापरवाही बरतने का संगीन आरोप लगाया है। परिजनों कि माने तो बच्ची का गिल्टी का इलाज चल रहा था, लेकिन डॉक्टर ने इलाज के दौरान उसके गर्दन की नस काट दी।
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मामले को दबाने रसूख का इस्तेमाल
इस कथित लापरवाही के बाद मासूम बच्ची की हालत नाजुक हो गई और उसकी जान हलक में अटक गई है। वहीं घटना से आक्रोशित और बेबस परिजन न्याय की गुहार लगाते हुए गुरुवार की शाम डॉक्टर की क्लीनिक पर ही धरने पर बैठ गए। रोते-बिलखते गरीब परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने अपनी गलती छुपाने और मामले को दबाने के लिए अपने रसूख का इस्तेमाल किया है। घटना की सूचना मिलते ही एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी समेत कोतवाली थाने का भारी पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया।
न्याय के लिए भटकने को मजबूर
परिजनों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने डॉक्टर के प्रभाव में आकर उन पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिससे पीड़ित परिवार की आवाज को दबाया जा सके। क्लीनिक परिसर में घंटों तक हाई-प्रोफाइल ड्रामा और मान-मनौव्वल का खेल चलता रहा। आखिरकार डॉक्टर अपने रसूख और प्रशासनिक सहयोग के बल पर मासूम बच्ची और उसके परिजनों को क्लीनिक से हटाकर किसी दूसरी जगह भेजने की अपनी योजना में कामयाब हो गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद डॉक्टर और प्रबंधन की ओर से कथित तौर पर मामले पर पूरी तरह पर्दा डालने की कोशिशें की जा रही हैं, जबकि पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटकने को मजबूर है।

