वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। देश में सामाजिक न्याय, समानता और आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर व्यापक नीति समीक्षा की मांग उठी है। UGC Equity Regulations 2026, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989, कर्नाटक के प्रस्तावित Rohith Vemula Bill 2026 तथा वर्तमान आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर समानता, निष्पक्षता, प्राकृतिक न्याय और आर्थिक-सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की मांग की गई है। इन्हीं सब मुद्दों को लेकर आज बिलासपुर में सवर्ण समाज ने रैली निकालकर कलेक्टर को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।

मांग करने वालों का कहना है कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, गरिमा, स्वतंत्रता और कानून के समक्ष समान संरक्षण का अधिकार देता है। ऐतिहासिक रूप से वंचित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सहित कमजोर वर्गों के संरक्षण और उत्थान के लिए बनाए गए संवैधानिक प्रावधानों एवं कानूनों के सामाजिक उद्देश्य का सम्मान किया जाना चाहिए।

हालांकि, उनका तर्क है कि स्वतंत्रता के लगभग आठ दशक बाद देश की बदलती सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा कानूनों एवं नीतियों की समय-समय पर समीक्षा आवश्यक है। उनका कहना है कि समीक्षा का उद्देश्य किसी वर्ग विशेष के संवैधानिक अधिकार या संरक्षण को समाप्त करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और न्यायसंगत बनाना होना चाहिए।

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