सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर स्पष्ट रूप से बताए कि क्लब में सदस्यों का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया जाता है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में दिए गए निर्देश के जवाब में क्लब की ओर से दाखिल दस्तावेजों पर नाराजगी जताई। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने क्लब के जवाब को दस्तावेजों का उलझा हुआ ढेर बताया। पीठ ने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट रूप से यह जानकारी मांगी थी कि क्लब में सभी श्रेणियों के लिए सदस्यता देने की प्रक्रिया क्या है और इसके लिए फीस का स्ट्रक्चर किस तरह तय किया गया है। पीठ ने क्लब को निर्देश दिया कि वह अगले एक सप्ताह में इन दोनों बिंदुओं पर स्पष्ट और व्यवस्थित जानकारी कोर्ट के समक्ष पेश करे।
मेंबरशिप प्रक्रिया पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली गोल्फ क्लब (DGC) को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर स्पष्ट रूप से बताए कि क्लब में सदस्यों का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया जाता है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में दिए गए निर्देश के जवाब में क्लब की ओर से दाखिल दस्तावेजों पर नाराजगी जताई। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि क्या कोर्ट कागजों के जंजाल में उलझता रहे? पीठ ने सवाल किया कि क्या क्लब कोर्ट के आदेश को इसी तरह समझता है। कोर्ट ने कहा कि क्लब की ओर से दाखिल हलफनामे से वह संतुष्ट नहीं है। इसमें सदस्यता देने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए थी।
एक सप्ताह में दाखिल होगा छोटा हलफनामा
क्लब की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि वह जरूरी जानकारी के साथ एक छोटा हलफनामा दाखिल करेंगे। कोर्ट ने कहा कि उसे यह स्पष्ट जानकारी चाहिए कि क्लब में सभी श्रेणियों के लिए सदस्यता देने की प्रक्रिया क्या है और फीस का स्ट्रक्चर किस तरह तय किया गया है। पीठ ने क्लब को एक सप्ताह में यह जानकारी व्यवस्थित तरीके से रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।
24 अगस्त को भी दिए थे निर्देश
दरअसल, 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने क्लब से कहा था कि वह सभी कैटेगरी के लिए सदस्यता देने से जुड़े नियमों, लागू उप-नियमों और अपनाए गए तरीकों व प्रक्रियाओं की जानकारी रिकॉर्ड पर लाए। यह मामला दिल्ली निवासी राजीव सूरी की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में हेरिटेज इमारतों के रखरखाव से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। इसी सुनवाई के दौरान दिल्ली गोल्फ क्लब की सदस्यता से जुड़े नियमों और प्रक्रिया की जांच का मामला सामने आया।
10 हेरिटेज इमारतों के रखरखाव पर भी फटकार
यह मामला दिल्ली निवासी राजीव सूरी की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में हेरिटेज इमारतों के रखरखाव से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। पिछली सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली गोल्फ क्लब को उसकी सीमा के अंदर और आसपास मौजूद 10 हेरिटेज इमारतों का उचित रखरखाव नहीं करने को लेकर फटकार लगाई थी। इन ऐतिहासिक इमारतों में शुरुआती मुगल काल का एक मकबरा, मीर तकी का मकबरा, सैयद आबिद का मकबरा, गेटवे और तुगलक काल का बारह खंभा समेत अन्य पुरानी संरचनाएं शामिल हैं।
कोर्ट कमिश्नरों ने किया साइट का निरीक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन के साथ अधिवक्ता निपुण सक्सेना और विशाल सिन्हा को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया था। कोर्ट कमिश्नरों ने साइट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि क्लब के अंदर मौजूद कई सुविधाएं इन ऐतिहासिक इमारतों के बेहद करीब बनाई गई हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इन स्मारकों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को बनाए रखने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए थे।
लाल बंगला के आसपास 100 मीटर में गतिविधियों पर रोक
क्लब के प्रवेश द्वार के पास स्थित ‘लाल बंगला I’ और ‘लाल बंगला II’ 1779-80 ईस्वी के हैं और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की देखरेख में केंद्रीय रूप से संरक्षित स्मारक हैं। कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को दोनों संरक्षित इमारतों के आसपास 100 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी तरह की गतिविधि पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा अन्य ऐतिहासिक इमारतों के आसपास भी लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई। क्लब ने कोर्ट को बताया था कि इन स्मारकों के जीर्णोद्धार का काम आगा खान ट्रस्ट को सौंपा गया है। हालांकि, जुलाई में बेंच ने ट्रस्ट की ओर से किए गए मरम्मत कार्य की समीक्षा की और इमारतों पर किए गए चूने के प्लास्टर पर आपत्ति जताई। कोर्ट के मुताबिक, इस प्लास्टर से स्मारकों पर मौजूद बारीक नक्काशी और डिजाइन ढक गए थे।
1100 हेरिटेज साइट्स की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश
इस साल फरवरी में याचिकाकर्ता राजीव सूरी ने 2021 की एक रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की थी, जिसमें दिल्ली की 1,100 अधिसूचित हेरिटेज साइट्स का विवरण था। इसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने ASI, दिल्ली सरकार, MCD और NDMC से जवाब मांगा था और इन धरोहर स्थलों की पुरानी स्थिति बहाल करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा था। सूरी की पहल पर डिफेंस कॉलोनी में लोधी काल के एक स्मारक को भी बहाल किया गया। इसके बाद दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग ने उसे संरक्षित स्मारक घोषित किया।
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