सुप्रीम कोर्ट ने वडोदरा (गुजरात) की एक महिला द्वारा जाम्बिया में रह रहे एक प्रवासी भारतीय (NRI) के खिलाफ दर्ज कराई गई FIR को रद्द कर दिया है। महिला ने आरोपी पर शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया था। शीर्ष अदालत ने 7 सितंबर को दिए अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सहमति से बने संबंधों में केवल मां की असहमति के कारण शादी न हो पाना धोखेबाज़ी या बेईमानी की श्रेणी में नहीं आता।
क्या था पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, महिला की नवंबर 2022 में फेसबुक के जरिए NRI व्यक्ति से मुलाकात हुई थी। फरवरी 2024 में वडोदरा में पहली मुलाकात के दौरान दोनों दो दिनों तक एक होटल में साथ रहे, जहां उनके बीच यौन संबंध बने। महिला का आरोप था कि व्यक्ति ने दिसंबर 2024 तक शादी करने का वादा किया था, लेकिन जनवरी 2025 में यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उसकी मां इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं हैं।
इसके बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसमें धोखे से या शादी का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।
अदालत की अहम टिप्पणी
गुजरात हाईकोर्ट ने मई में FIR रद्द करने से इनकार करते हुए कहा था कि मां का विरोध ‘उचित कारण’ नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि शिकायत के तथ्य स्पष्ट रूप से सहमति से बने रिश्ते की ओर इशारा करते हैं।
कोर्ट के अनुसार, ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि व्यक्ति की मंशा शुरू से ही धोखा देने की थी। व्यक्ति की ओर से पक्ष रखते हुए वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी ने महिला के परिवार को आर्थिक सहायता, मोबाइल फोन और कपड़े भी भेजे थे, जो उसके सकारात्मक इरादे को दर्शाते हैं।
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