कर्ण मिश्रा, Gwalior. देश के सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित राजघरानों में से एक सिंधिया राजवंश से जुड़ी खबर सामने आई है। राजपरिवार के बीच पिछले करीब चार दशकों यानि 40 साल से चला आ रहा 40 हजार करोड़ रुपये की अकूत पैतृक संपत्ति का कानूनी विवाद हमेशा के लिए खत्म होने जा रहा है। ग्वालियर हाइकोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस महा-समझौते पर अंतिम मुहर लग सकती है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच आपसी सहमति से वर्षों पुरानी इस कानूनी जंग को विराम देने की पूरी तैयारी हो चुकी है।

1988 से माधवराव के निधन के बाद बढ़ा था विवाद

सिंधिया राजवंश में इस महल अतरिया की कानूनी लड़ाई का इतिहास काफी पुराना है:

विवाद की शुरुआत: पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर मतभेद की शुरुआत वर्ष 1988-89 में हुई थी, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत माधवराव सिंधिया और उनकी तीनों बहनों के बीच दूरियां बढ़ी थीं।

बुआ बनाम भतीजा: साल 2001 में एक विमान हादसे में माधवराव सिंधिया के आकस्मिक निधन के बाद यह कानूनी लड़ाई ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं (उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे सिंधिया) के बीच जारी रही।

बेटियों का समान अधिकार: राजमाता विजयाराजे सिंधिया की तीनों बेटियों ने अदालत में दावा ठोका था कि पिता की पैतृक संपत्ति में बेटियों का भी बेटों के समान वैधानिक अधिकार है। इसके जवाब में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपना दावा पेश किया था। वर्ष 2017 में यह मामला हाईकोर्ट की दहलीज पर पहुंचा था।

समझौते के दायरे में हैं ये ऐतिहासिक महल और ‘दुर्लभ शिवलिंग’

यह कोई आम पारिवारिक बंटवारा नहीं है, बल्कि इसमें देश की कई ऐतिहासिक और बेशकीमती धरोहरें शामिल हैं:

शाही महल और कोठियां: समझौते के तहत ग्वालियर का भव्य जयविलास पैलेस, ऊषा किरण पैलेस, रानी महल, छोटी विश्रांति, हिरण्यवन कोठी, शिवपुरी का माधव विलास पैलेस, इंदौर का हैप्पी विलास, उज्जैन का ऐतिहासिक कालियादेह पैलेस, पुणे का प्रभात विलास पैलेस, दिल्ली का सिंधिया विला और ग्वालियर हाउस सहित मुंबई की समुद्र तटीय संपत्ति और वाराणसी का प्रसिद्ध सिंधिया घाट शामिल हैं।

पन्ना रत्न का शिवलिंग: इस पूरे समझौते में सबसे खास और अनमोल विरासत पन्ना रत्न से निर्मित दुर्लभ शिवलिंग है, जो सिंधिया राजवंश की अगाध आस्था और शाही पहचान का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा कई बड़े ट्रस्ट, शेयर निवेश और अन्य कीमती संपत्तियां भी इस दायरे में हैं।

हाईकोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी अंतिम सुनवाई

लगभग 16 वर्षों तक जिला अदालत और हाईकोर्ट में चली लंबी कानूनी खींचतान के बाद, आखिरकार दोनों पक्षों ने परिपक्वता दिखाते हुए आपसी समझौते का रास्ता चुना है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को समझौते का फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे। ग्वालियर हाईकोर्ट में सभी पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे और अपनी अंतिम वैधानिक सहमति दर्ज कराएंगे।

तस्वीर होना बाकी है साफ

हालांकि अभी यह पूरी तरह से गोपनीय रखा गया है कि किस वारिस के हिस्से में कौन सा महल, कोठी या संपत्ति आएगी। कोर्ट की हरी झंडी और समझौते के दस्तावेजों पर अंतिम हस्ताक्षर होने के बाद ही सिंधिया राजवंश की संपत्तियों के अंतिम बंटवारे की वास्तविक तस्वीर साफ होगी।

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