मुकेश मेहता, बुधनी /सीहोर। जिले में स्कूलों को बंद रखने को लेकर जिला प्रशासन के आदेश की टाइमिंग पर अब सवाल उठने लगे हैं। सोमवार को जिला प्रशासन की ओर से स्कूल बंद रखने का आदेश तब जारी किया गया, जब हजारों बच्चे स्कूल पहुंच चुके थे और कक्षाएं शुरू हो चुकी थीं।

जिले में स्कूलों का समय सुबह 7:30 बजे निर्धारित है। ऐसे में हजारों बच्चे सुबह करीब 6 बजे उठकर तैयार होते हैं और लगभग 6:15 बजे घरों से स्कूल के लिए निकल जाते हैं। कई बच्चे लंबी दूरी तय कर स्कूल पहुंचते हैं। सोमवार को भी यही हुआ। बच्चे स्कूल पहुंचे और पढ़ाई शुरू हुई, लेकिन इसके बाद सुबह 9:55 बजे कलेक्टर द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया गया।

जब कल दिन-रात बारिश हो रही थी तो रात में क्यों नहीं हुआ फैसला?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिले में कल दिनभर और रातभर बारिश होती रही। यदि बारिश और मौसम की स्थिति को देखते हुए स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया जाना था, तो जिला प्रशासन द्वारा यह आदेश रात में ही जारी किया जा सकता था, जिससे अभिभावकों को पहले से जानकारी मिल जाती और वे बच्चों को सुबह स्कूल भेजते ही नहीं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सुबह बच्चे तैयार होकर घरों से निकल गए, स्कूल पहुंच गए और कक्षाओं में बैठ गए। इसके बाद सुबह 9:55 बजे आदेश जारी हुआ।

शासकीय स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की तैयारी भी हो चुकी थी

इस देरी का एक और सीधा असर शासकीय स्कूलों पर पड़ा। स्कूल खुलने के बाद वहां मध्यान्ह भोजन की तैयारी भी शुरू हो चुकी थी। भोजन के लिए आवश्यक सामग्री और व्यवस्था की जा चुकी थी। ऐसे में बाद में स्कूल बंद करने का आदेश आने से स्कूल प्रबंधन के सामने भी असमंजस की स्थिति पैदा हुई। सवाल यह भी है कि यदि स्कूल बंद रखने का निर्णय पहले से लिया जाता तो हजारों बच्चों को स्कूल आने से रोका जा सकता था और स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की तैयारी सहित अन्य व्यवस्थाओं में होने वाली अनावश्यक मेहनत और खर्च को भी बचाया जा सकता था।

बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कुछ नहीं, लेकिन फैसला समय पर होना चाहिए

मौसम खराब होने की स्थिति में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि प्रशासन को लगा कि बारिश के कारण बच्चों को स्कूल भेजना उचित नहीं है तो यह फैसला समय रहते लिया जाना चाहिए था। आदेश जारी करने के बाद यह कहना कि स्कूल बंद हैं, उस समय कितना प्रभावी होगा जब बच्चे पहले ही स्कूल पहुंच चुके हों? अभिभावकों का सवाल बिल्कुल साफ है- जब कल दिन और रात बारिश की स्थिति प्रशासन के सामने थी, तो स्कूल बंद करने का आदेश रात में क्यों नहीं जारी किया गया?

कलेक्टर से जवाब मांग रहा है सवाल- आदेश का फायदा आखिर किसे मिला?

प्रशासनिक आदेश केवल जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वह समय पर जारी हो और समय पर जनता तक पहुंचे, यह भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। बच्चों की सुरक्षा, अभिभावकों की परेशानी, स्कूलों की व्यवस्था और शासकीय स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की तैयारी—इन सभी पहलुओं को देखते हुए जिला प्रशासन को बताना चाहिए कि स्कूल बंद करने का निर्णय सुबह 9:55 बजे तक क्यों टाला गया?

बच्चे सुबह स्कूल पहुंच गए, कक्षाएं लग गईं, मध्यान्ह भोजन की तैयारी हो गई और उसके बाद छुट्टी का आदेश आया। अब अभिभावकों का सीधा सवाल है- “कलेक्टर साहब, जब बारिश कल दिन-रात से हो रही थी, तो बच्चों के स्कूल पहुंचने का इंतजार क्यों किया गया? आदेश रात में क्यों नहीं?” बच्चों के हित में फैसला हो, लेकिन समय पर हो, क्योंकि देर से लिया गया सही फैसला भी कई बार अपना उद्देश्य खो देता है।