अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में रजिस्ट्री विभाग के भीतर सरकारी नियमों और तकनीकी सुविधाओं का इस्तेमाल आम जनता को राहत देने के लिए नहीं बल्कि उनकी जेब काटने के लिए किया जा रहा है। सोहागपुर उप-पंजीयक यानि सब रजिस्ट्रार कार्यालय से भ्रष्टाचार का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पदस्थ उप-पंजीयक सचिन जैन पर शासन की गाइडलाइन का खुलेआम दुरुपयोग कर अवैध वसूली का सिंडिकेट चलाने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस बड़े फर्जीवाड़े और मनमानी के खिलाफ अब क्षेत्र के सेवा प्रदाताओं ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने संभागायुक्त, कलेक्टर और पंजीयन विभाग के शीर्ष अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर इस ‘रजिस्ट्री खेल’ की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और आरोपी अधिकारी को तत्काल हटाने की मांग की है।

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‘अवैध वसूली’ का खेल?

सोहागपुर स्थित उप पंजीयक कार्यालय में पदस्थ उप पंजीयक पर नियमों के कथित दुरुपयोग, अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए शहडोल संभाग के आयुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि पंजीयन कार्यों में शासन की गाइडलाइन और प्रचलित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे आम नागरिकों और पक्षकारों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

आवासीय भूमि को जबरन ‘व्यावसायिक’ घोषित करना

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि आवासीय भूखंडों को व्यावसायिक मानकर उनका मूल्यांकन किया जा रहा है, जिससे स्टांप शुल्क अधिक निर्धारित होता है। बाद में प्रकरण में सुधार के नाम पर कथित रूप से अवैध राशि की मांग की जाती है।

जियो-टैगिंग की आड़ में ब्लैकमेलिंग

शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि जियो टैगिंग की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर वास्तविक स्थिति के विपरीत आपत्तियां लगाई जाती हैं और पक्षकारों पर आर्थिक दबाव बनाया जाता है। इसके अलावा सहखातेदार एवं संयुक्त खातों के पंजीयन मामलों में भी अनावश्यक आपत्तियां लगाकर प्रकरण लंबित रखने और कार्य करने के बदले अवैध धनराशि मांगने के आरोप लगाए गए हैं।

हड़ताल की चेतावनी, जांच होने पर खुलेंगी कई परतें

शिकायत में कहा गया है कि यदि इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी को पंजीयन कार्य से पृथक रखा जाए तथा प्रभारी की जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को सौंपी जाए, साथ ही आवासीय भूमि के व्यावसायिक मूल्यांकन, जियो टैगिंग और विवादित पंजीयन प्रकरणों की भी अलग से समीक्षा कराई जाए, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं अन्य नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई करने की जाए।

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सब-रजिस्ट्रार सचिन जैन का पलटवार: ‘आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत’

इस पूरे मामले में जिला उप पंजीयक सचिन जैन का कहना है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया, फीस और स्लॉट बुकिंग को लेकर लग रहे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सचिन जैन का कहना है कि कार्यालय में केवल नियमानुसार शासकीय स्टाम्प शुल्क और पंजीयन फीस ली जाती है, जिसे ऑनलाइन चालान प्रक्रिया के माध्यम से ही जमा कराया जाता है। शासकीय शुल्क में कमी पर प्रकरण ‘कलेक्टर ऑफ स्टाम्प’ को भेजा जाता है, अवैध वसूली के आरोप निराधार है।

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