अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्य प्रदेश की आदिवासी राजनीति में एक नई हलचल उस वक्त देखने को मिली, जब भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के इकलौते सैलाना विधानसभा क्षेत्र के विधायक कमलेश्वर डोडियार आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले के दौरे पर पहुंचे, मोटरसाइकिल से विधानसभा पहुंचकर सुर्खियों में आए विधायक डोडियार ने शहडोल की धरती से न सिर्फ राजनीतिक नब्ज टटोली, बल्कि आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार और जिले की बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर तीखा हमला बोला।
भारत आदिवासी पार्टी ने शहडोल पहुंचकर साफ कर दिया कि वह अब सिर्फ सीमित क्षेत्रों तक नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में आदिवासियों के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ेगी, विधायक कमलेश्वर डोडियार ने ऐलान किया कि आगामी 16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में शहडोल जिले से जुड़े आदिवासियों के गंभीर मुद्दों को जोरदार तरीके से सदन में उठाया जाएगा।
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डोडियार ने जिले के आदिवासी छात्रावासों से छात्राओं के लापता होने के मामलों पर गहरी चिंता जताते हुए इसे बेहद गंभीर और संवेदनशील मुद्दा बताया,उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन इस दिशा में न तो पारदर्शी जांच कर रहा है और न ही ठोस कार्रवाई सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी छात्राएं ही सुरक्षित नहीं हैं, तो सरकार के तमाम दावे खोखले साबित होते हैं। इसके साथ ही विधायक डोडियार ने शहडोल की कानून व्यवस्था पर भी करारा प्रहार किया,उन्होंने एएसआई और पटवारी की कुचलकर हत्या, तहसीलदार पर रेत माफियाओं द्वारा किए गए हमले और पुलिस पर लगातार हो रहे हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि जिले में माफिया तंत्र पूरी तरह हावी हो चुका है।
खनिज माफिया, भू-माफिया और कोल माफिया प्रशासन को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। रेत ठेका नहीं होने के चलते अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर सवाल उठाते हुए डोडियार ने आरोप लगाया कि शहडोल से बड़े पैमाने पर चोरी की रेत उत्तर प्रदेश भेजी जा रही है, और पुलिस माफियाओं के सामने बेबस नजर आ रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि हालात ऐसे हैं मानो पुलिस ने माफियाओं के सामने घुटने टेक दिए हों। विधायक डोडियार ने दो टूक कहा कि जब प्रशासन और पुलिस ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता और आदिवासी समाज की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो भारत आदिवासी पार्टी शहडोल से एक बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगी और आदिवासियों को उनका हक दिलाने के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा।

