अजय सैनी, भिवानी। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल के पक्ष में पूर्ण बहुमत न मिल पाने पर भाजपा राष्ट्रीय परिषद के सदस्य शंकर धूपड़ ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को धरातल पर उतारने की ईमानदार कोशिश को विपक्ष ने अपने स्वार्थ की भेंट चढ़ा दिया। धूपड़ ने स्पष्ट किया कि 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित न होना उन करोड़ों महिलाओं के साथ अन्याय है, जो 2029 के चुनावों में 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ अपनी निर्णायक भूमिका देख रही थीं।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता के अनुसार, सरकार जनगणना और परिसीमन की प्रतीक्षा किए बिना महिलाओं को उनका हक देना चाहती थी, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने उत्तर-दक्षिण विभाजन की राजनीति कर इसमें रोड़ा अटकाया।
उन्होंने दावा किया कि विपक्ष को डर है कि महिला नेतृत्व उभरने से उनका जनाधार समाप्त हो जाएगा। धूपड़ ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का हवाला देते हुए कहा कि परिसीमन केवल न्याय और समानता का आधार है।
उन्होंने विश्वास दिलाया कि संख्याबल की कमी से बिल भले ही अभी रुका हो, लेकिन भाजपा महिलाओं को राष्ट्र निर्माता के रूप में उनका संवैधानिक हक दिलाने के संकल्प पर अडिग है।

