Shardiya Navratri 2025: मेवाड़ में महिषमर्दिनी जिसे स्थानीय जावर माता के नाम से जाना जाता है। इनको खदान की देवी कहा जाता है। उनका एक नाम धनवंती देवी भी है। इस मंदिर और प्रतिमा को लेकर कई मान्यताएं हैं।
माता की मेहर कभी महाराणा लाखा पर हुई तो खान खुली और मेवाड़ के भाग जागे। इस बात का उल्लेख भारत गायन में होता है। इस धातु की धरयाणी ने मेवाड़ को धन्य किया। यहां ऐसे सिक्के ढले, जिनकी साख पूरे देश में थी। वे नाणा कहलाते थे। जावर की पहचान टक्क, लाट और कर्नाटक तक थी।

वहां के व्यापारियों के साथ मेवाड़ के शासकों के व्यापारिक संबंध थे। ये संबंध लगभग ढाई हजार साल तक बने रहे और बसरा तथा चीन में इस खदान की याति रही। जावर माता का मंदिर लगभग दसवीं सदी का है और मूल रूप में वैष्णव स्थापत्य को धारण किए हैं।
देवी कब बिराजी? कहना कठिन है क्योंकि धातु, धन और धरयाणी का भेद कभी डंके की चोट पर नहीं बताया जाता। जगत के रास्ते उनका आगमन हुआ। महाराणा कुभा के शासन काल में प्रधानमंत्री सहणपाल नवलखा और वेलाक यहां के प्रबंधक रहे। उनका नाम शिलालेख और ताम्रपत्र में मिलता हैं। दोनों नवरात्रि में यहां भारी भीड़ रहती है। जावर माता भक्तों को क्या नहीं देती! वह भंडार भरती है, दारिद्र हरती है।
भगवान श्रीकृष्ण द्वारपाल
पुजारी जगदीश रावल ने बताया कि औदिच्य समाज के पुजारी परिवार ओसरे से माता की पूजा-अर्चना करते हैं। यहां माता महिषासुर मर्दिनी के रूप में विराजित है। उनके द्वारपाल के रूप में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान हैं। यहां होली के बाद नवमी पर मेला भरता है और रंग खेला जाता है। देवी आदिवासी खराड़ी समाज की कुलदेवी मानी जाती है। वर्तमान में बाहर की अन्य व्यवस्थाएं देवस्थान विभाग देख रहा है।
पढ़ें ये खबरें
- iPhone 18 series launch: Apple ने पेश किया फोल्डेबल iPhone Duo, iPhone 18 Pro और Pro Max भी लॉन्च, जाने कीमत और फीचर्स
- सिर्फ 200 रुपये के लिए खूनी विवाद, उधार के पैसे नहीं देने पर युवक पर चाकू से हमला
- न सीमेंट कमजोर था, न सरिया… फिर बरेली में कैसे गिरी पानी की टंकी? जानने के लिए पढ़ें जल निगम की रिपोर्ट
- ‘ट्रैफिक गर्ल’ शुभी जैन का पुलिस पर गंभीर सवाल! बोलीं- ‘लेडीज जात’ कहकर की बदसलूकी, पुलिस ही आम जनता से ऐसा व्यवहार करेगी तो कैसे होगा भरोसा?
- Zudio स्टोर में चोरी करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार, नगदी सहित लाखों का सामान बरामद


