”Patience has its limits.” श्रीमद्भगवद्गीता का प्रसिद्ध श्लोक क्रोधाद्भवति संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः। स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात् प्रणश्यति॥” इस श्लोक में संकेत है कि क्रोध से मोह, मोह से स्मरणशक्ति का भ्रम, स्मरणशक्ति के भ्रम से बुद्धि का नाश और बुद्धि के नाश से मनुष्य का पतन (विनाश) हो जाता है। 
 सदैव यह भाव रखकर जीवन व्यतीत करना चाहिए कि माधव की दृष्टि प्रतिपल हम पर बनी हुई है। हमारे प्रत्येक शब्द, प्रत्येक आचरण और प्रत्येक विचार का सूक्ष्मता के साथ अवलोकन किया जा रहा है। यही भय और यही भाव हमें, संयम, मर्यादा और सजगता के मार्ग में बनाए रखता है।

महाभारत की एक प्रसिद्ध और शिक्षाप्रद कथा है चेदिराज शिशुपाल की। यह भविष्यवाणी उसके जन्म के समय ही हो चुकी थी कि उसका अंत भगवान श्रीकृष्ण के हाथों ही होगा। तब शिशुपाल की माता ने श्रीकृष्ण से करुण प्रार्थना कर पुत्र का जीवनदान माँगा था जिसके जवाब में वात्सल्य से भरकर श्रीकृष्ण ने वचन दिया था कि “मैं उसके सौ अपराधों को अवश्य क्षमा करूँगा।”कृष्ण जी का यह वचन उनके करुणा और धैर्य का प्रमाण था।

युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में जब श्रीकृष्ण को ‘अग्रपूजा’ देकर सर्वोच्च सम्मान दिया गया तब शिशुपाल का अहंकार जाग गया और वो क्रोध से उन्मत्त होकर भरी सभा में अपशब्दों से श्रीकृष्ण का अपमान करने लगा। श्रीकृष्ण शांतचित्त होकर उसके हर अपशब्द को धैर्यपूर्वक सुनते और गिनते रहे। जब शिशुपाल ने सौ अपशब्दों की सीमा लांघकर मर्यादा की रेखा पार की तब श्रीकृष्ण ने अंतिम चेतावनी के साथ सुदर्शन चक्र का प्रयोग किया और शिशुपाल का वध कर दिया। वस्तुतः यह दंड नहीं था बल्कि मर्यादा की सीमा के उल्लंघन का गंभीर परिणाम था। इस कथा का सार गहरा है। सक्षम व्यक्ति यदि हमारे अपमान को सहन कर रहा है तो यह हमारी वीरता नहीं बल्कि उनका धैर्य समझना चाहिए। जैसे एक बलिष्ठ और शक्तिशाली पिता अपने किशोरवय पुत्र के प्रहार पर उसकी प्रसन्नता के लिए पराजय का अभिनय करता है, कई बार हर तरह से सक्षम व्यक्ति मौन रहकर सामने वाले को अवसर देता हैं। लेकिन उनके इस मौन को अपनी शक्ति का प्रमाण समझ लेना घातक भूल साबित होती है। बहुत आवश्यक है कि हम अपने शब्दों, व्यवहार और प्रतिक्रियाओं की मर्यादा पहचानते हुए समय, परिस्थिति और अपनी योग्यता के अनुरूप संयमित होकर प्रतिक्रिया दें। अन्यथा जब संयम की सीमा टूटती है, तब परिणाम अवांछित ही आता है, मर्यादा का अतिक्रमण अंततः विनाश का कारण बनता है।

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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