भिवानी के शिव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन अनिता शास्त्री ने भगवान की लीलाओं का गुणगान कर भक्तों को भावविभोर कर दिया।

अजय सैनी, भिवानी। स्थानीय भीम स्टेडियम रोड स्थित शिव मंदिर में आयोजित भव्य श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास अनिता शास्त्री ने अपनी सुमधुर वाणी से अमृत वर्षा करते हुए उपस्थित जनसमूह को भक्ति के सागर में सराबोर कर दिया। उन्होंने संगीतमय कथा का रसपान कराते हुए प्रतिपादित किया कि कलियुग के त्रिविध तापों से मुक्ति का एकमात्र और सुलभ माध्यम श्रीहरि की भक्ति और श्रीमद्भागवत महापुराण का श्रवण है। कथा के दौरान उन्होंने विभिन्न अवतारों की दिव्य लीलाओं का गुणगान किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भक्ति भाव से सराबोर होकर कथा के प्रत्येक प्रसंग को बड़े ध्यान से सुन रहे थे।

गोकर्ण उपाख्यान और धर्म की विजय

कथा के दौरान अनिता शास्त्री ने गोकर्ण उपाख्यान का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। धुंधकारी के चरित्र के माध्यम से उन्होंने समाज को सचेत करते हुए बताया कि अधर्म, पाप और आसुरी शक्तियां चाहे कितनी भी वैभवशाली क्यों न दिखें, उनका अंत निश्चित है। उन्होंने कपिल मुनि के अवतार का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भक्ति भक्तों के हृदय में निवास करती है। शास्त्री जी ने स्पष्ट किया कि जब भी जीवन में विपत्ति आए, तो मनुष्य को घबराने के बजाय भगवान श्रीकृष्ण के चरण कमलों का अनन्य चिंतन करना चाहिए। उन्होंने पांडवों और द्रौपदी के उदाहरण से समझाया कि प्रभु सदैव अपने शरणागत भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।

भक्ति से दूर होते कलियुग के दोष

व्यास पीठ से शास्त्री ने एक सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे सिंह की गर्जना से भेड़िए भयभीत होकर भाग जाते हैं, ठीक वैसे ही श्रीमद्भागवत महापुराण की ध्वनि से कलियुग के पाप और विकार दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस युग में केवल भक्ति ही मोक्ष प्रदान करने वाली परम शक्ति है। कथा के दूसरे दिन इस आध्यात्मिक आयोजन में मनीष, आशीष, डॉ. श्यामेंदु सिंह, धर्मपाल, हरीश, राजकुमार, अनिल और यश सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा का समापन आरती के साथ हुआ, जिसके बाद भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया। आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में भी कथा के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों पर चर्चा की जाएगी।