भुवनेश्वर: बीजद के राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री श्री जुएल ओराम को पत्र लिखकर ओडिशा के सिजीमाली में चल रहे संघर्ष में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
उन्होंने प्रस्तावित बॉक्साइट खनन परियोजना का विरोध कर रहे आदिवासी समुदायों के खिलाफ पुलिस की मनमानी कार्रवाई को उजागर किया।
डॉ. पात्रा ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान आदिवासियों को लगी चोटों पर चिंता व्यक्त की और उनके अधिकारों तथा गरिमा की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने तीन प्रमुख मुद्दों पर बल दिया: पुलिस की ज्यादतियों से आदिवासी समुदायों की सुरक्षा, खनन गतिविधियों में ग्राम सभाओं की स्वतंत्र और सूचित सहमति सुनिश्चित करना, और PESA तथा वन अधिकार अधिनियम के तहत वैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन करना।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि वे स्थिति से निपटने और प्रभावित समुदायों के बीच विश्वास बहाल करने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री से बातचीत करें। डॉ. पात्रा ने कहा कि जुएल ओराम की ओडिशा से जुड़ी पृष्ठभूमि और केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री के रूप में उनका पद, तनाव कम करने में उनके हस्तक्षेप को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
पत्र में खनन परियोजनाओं से जुड़े विवादों को सुलझाने में बातचीत और कानूनी प्रक्रियाओं के महत्व को रेखांकित किया गया। डॉ. पात्रा ने जोर देकर कहा कि आगे और अशांति रोकने के लिए ग्राम सभा की सहमति का सम्मान किया जाना चाहिए और वैधानिक सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने अंत में इस बात पर जोर दिया कि समय पर और संतुलित हस्तक्षेप से एक सौहार्दपूर्ण समाधान प्राप्त करने में मदद मिलेगी, साथ ही सिजीमाली में आदिवासी समुदायों के अधिकारों की भी रक्षा हो सकेगी।
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