सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी अब किसानों के लिए खतरे की घंटी बनती जा रही है। खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। फसलें झुलसने लगी हैं और कई इलाकों में किसान दिन-रात फसल बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है। 

फसलें झेल रही गर्मी की मार

सिंगरौली जिले के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों सूरज आग उगल रहा है। सुबह से ही गर्म हवाएं चलने लगती हैं और दोपहर होते-होते खेतों की मिट्टी तवे की तरह तपने लगती है। जिले के कई गांवों में खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। सब्जियों और दलहन की फसलें गर्मी की मार झेल रही हैं। कई किसानों का कहना है कि सिंचाई के कुछ घंटे बाद ही खेत फिर सूख जा रहे हैं। इतनी गर्मी पहले कम देखने को मिलती थी। अब हालत ये है कि दिन में खेत में खड़ा होना मुश्किल हो गया है। पानी देते-देते किसान परेशान हो गए हैं।

पानी की कमी से बढ़ी किसानों की परेशानी

सिंगरौली के कई ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी भी किसानों की परेशानी बढ़ा रही है। कहीं ट्यूबवेल जवाब देने लगे हैं तो कहीं तालाब और छोटे जलस्रोत सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। खेती पर निर्भर छोटे किसान सबसे ज्यादा चिंता में हैं। क्योंकि अगर समय रहते फसल नहीं बची, तो पूरे सीजन की मेहनत और लागत दोनों डूब सकती हैं।

उत्पादन लगभग खत्म

किसान ने कहा, ‘हम टमाटर और दूसरी सब्जियों की खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे, लेकिन इस भीषण गर्मी ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों की नमी खत्म हो गई, टमाटर के पौधे सूख गए और उत्पादन लगभग खत्म हो चुका है।’

पशुपालन और ग्रामीण जीवन पर पड़ने लगा असर

गर्मी का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन और ग्रामीण जीवन पर भी पड़ने लगा है। गांवों में दोपहर के समय सन्नाटा पसरा रहता है और किसान सुबह-शाम ही खेतों में काम करने को मजबूर हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता तापमान और घटती नमी आने वाले समय में खेती के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि समय रहते सिंचाई, जल संरक्षण और राहत के इंतजाम नहीं किए गए तो इसका सीधा असर फसल उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ेगा।

खेतों की घटती नमी और सूखती फसलें आने वाले खतरे की चेतावनी

सिंगरौली के गांवों से सामने आ रही ये तस्वीरें साफ संकेत दे रही हैं कि भीषण गर्मी अब किसानों के लिए बड़ा संकट बन चुकी है। खेतों की घटती नमी और सूखती फसलें आने वाले खतरे की चेतावनी हैं। ऐसे में जरूरत है समय रहते सही इंतजाम और सतर्कता की… ताकि किसानों की मेहनत और खेतों की हरियाली दोनों बचाई जा सके। अब देखना होगा कि मौसम कब राहत देता है और प्रशासन किसानों की मदद के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

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