कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने संविदा कर्मचारी को अदालत के आदेश के बावजूद ड्यूटी ज्वाइन नहीं कराने के मामले में सिरसा प्रशासन पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सिरसा के उपायुक्त (DC), मुख्य कार्यकारी अधिकारी-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक तथा डबवाली के ब्लॉक विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) को अवमानना नोटिस जारी करते हुए व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि आखिर उसके स्पष्ट आदेश के बावजूद कर्मचारी को सेवा में क्यों नहीं लिया गया।

मामला एडिशनल ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर नीरू रानी की अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिका में बताया गया कि 18 सितंबर 2025 को हाई कोर्ट ने उनकी सेवा समाप्ति पर रोक लगाते हुए स्पष्ट आदेश दिए थे कि यदि कर्मचारी को हटाया गया है तो उसे तत्काल वापस लेकर 19 सितंबर 2025 से ड्यूटी पर बहाल किया जाए। आरोप है कि इसके बावजूद अधिकारियों ने न केवल अनुबंध आगे नहीं बढ़ाया बल्कि उन्हें दोबारा काम पर लौटने की अनुमति भी नहीं दी।

याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि प्रशासन जानबूझकर कोर्ट के आदेश की अनदेखी कर रहा है। इस पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि उसके आदेश की मंशा पूरी तरह स्पष्ट थी और अंतरिम राहत लगातार प्रभावी रही, फिर भी उसका पालन नहीं किया गया। अदालत ने माना कि पहली नजर में यह न्यायालय के आदेश की अवहेलना प्रतीत होती है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने सिरसा DC, मुख्य कार्यकारी अधिकारी-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक और डबवाली BDPO को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। अदालत ने तीनों अधिकारियों को 29 मई 2026 को सुबह 10 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। साथ ही यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि 18 सितंबर 2025 के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया और याचिकाकर्ता को सेवा में बने रहने की अनुमति क्यों नहीं दी गई।