अतीश दीपंकर, भागलपुर, सुल्तानगंज। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत के साथ ही पूरा क्षेत्र हर हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंज उठा है। मेले के पहले दिन ही देश-विदेश से पहुंचे लाखों कांवड़ियों ने उत्तरवाहिनी गंगा में पवित्र डुबकी लगाई और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए अपनी यात्रा शुरू की।

​श्रद्धालुओं का सैलाब और प्रशासनिक मुस्तैदी

​अजगैविनाथ धाम में पहले दिन से ही आस्था का सैलाब देखने को मिला। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, नेपाल और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुंचे हैं। कांवड़िए गंगा घाटों पर स्नान कर पवित्र जल अपने पात्र में भर रहे हैं और पुरोहितों से संकल्प कराने के बाद नाचते-गाते बाबा भोलेनाथ के दरबार की ओर बढ़ रहे हैं।
​मेले की सुरक्षा और व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी (DM) अलंकृता पाण्डेय और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमोद कुमार यादव ने संयुक्त रूप से मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने नमामी गंगे घाट, अजगैविनाथ गंगा घाट, कांवड़िया धर्मशाला और धांधी बेलारी कांवड़िया सेवा शिविर का दौरा कर व्यवस्थाओं को परखा।

​यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

​जिला प्रशासन ने श्रावणी मेले के मद्देनजर ट्रैफिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। कांवड़िया मार्ग पर सभी प्रकार के बड़े और छोटे वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मेला क्षेत्र में किसी भी वाहन को प्रवेश करने के लिए सुल्तानगंज थाने से विशेष अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है।

​जाम की समस्या और प्रशासनिक चुनौतियां

​फोरलेन मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ने के कारण मेले के पहले दिन कई घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही, जिससे कांवड़ियों को कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन ने इस पर शीघ्र और ठोस कदम नहीं उठाए, तो यातायात का यह दबाव सड़क दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकता है।

​साफ-सुथरा मेला क्षेत्र और जनसुविधाएं

​श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर परिषद सुल्तानगंज द्वारा गंगा घाटों से लेकर पूरे शहर में युद्ध स्तर पर सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही, पीएचईडी (PHED) विभाग की ओर से पूरे मेला क्षेत्र में पेयजल की आपूर्ति और अस्थायी शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।