सिरसा जिला जेल प्रशासन ने कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से पेट्रोल पंप पर तैनाती दी है। अच्छे आचरण वाले इन कैदियों को काम के बदले नियमित वेतन दिया जा रहा है और वे कड़ी सुरक्षा में शिफ्टों में सेवा दे रहे हैं।

सिरसा। जिला जेल प्रशासन ने बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनर्स्थापित करने के लिए एक विशिष्ट सुधारात्मक कदम उठाया है। जेल परिसर के निकट संचालित पेट्रोल पंप पर चार चुनिंदा कैदियों को वाहनों में पेट्रोल और डीजल भरने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पूरी योजना का मुख्य ध्येय कैदियों को काम का व्यावहारिक अनुभव प्रदान कर भविष्य के लिए तैयार करना है।

सुरक्षा व्यवस्था और अधिकारियों की देखरेख

सिरसा जिला जेल के अधीक्षक जसवंत सिंह के अनुसार, यह योजना हरियाणा सरकार और जेल महानिदेशक के निर्देशों के तहत संचालित की जा रही है। सुरक्षा तंत्र से किसी भी तरह का समझौता न हो, इसके लिए पुलिस जवानों की कड़ी निगरानी में कैदियों से कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित मानकों और उत्तम आचरण की समीक्षा के बाद ही कैदियों का चयन इस जिम्मेदारी के लिए किया गया है।

काम के बदले नियमानुसार वेतन

जेल अधीक्षक ने जानकारी दी कि पेट्रोल पंप पर सेवाएं देने वाले कैदियों को प्रशासन की तरफ से काम के बदले मानदेय प्रदान किया जा रहा है। यह व्यवस्था उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने में मददगार साबित होगी। सजा की अवधि समाप्त होने के उपरांत इस कार्य अनुभव के बल पर उन्हें बाहर रोजगार की प्राप्ति में सुगमता होगी।

दिन-रात की अलग-अलग शिफ्ट

पेट्रोल पंप पर सुरक्षा और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए कैदियों की ड्यूटी दिन तथा रात की अलग-अलग शिफ्टों में लगाई गई है। प्रत्येक शिफ्ट के दौरान जेल पुलिस के जवान लगातार तैनात रहते हैं, जिससे पेट्रोल पंप पर आने वाले आम नागरिकों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। इस व्यवस्था से कैदियों में अनुशासन और जिम्मेदारी का भाव उत्पन्न हो रहा है।

कैदी ने जाहिर की अपनी राय

जेल में सजा काट रहे बंदी बाबू लाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि लंबे समय तक जेल के बंद माहौल में रहने के बाद बाहर आकर कार्य करने से उन्हें सुकून मिला है। इस अवसर से उनमें जिम्मेदारी का अहसास हुआ है और भविष्य को लेकर सकारात्मक उम्मीद जगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिरसा जेल का यह पुनर्वास मॉडल प्रदेश की अन्य जेलों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है।